नई दिल्ली के भारत मंडपम में 12 और 13 सितंबर को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन आयोजित हुआ था। यह शिखर सम्मेलन अब खत्म हो चुका है। इस आयोजन में कूटनीतिक चर्चाएं भी खास रहीं। सबसे बड़ी बात यह है कि भारत ने इस सम्मेलन की मेजबानी की। इसके अलावा शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों ने तमाम मतभेदों के बीच सहमति बनाते हुए ‘न्यू दिल्ली डिक्लेरेशन’ को अपनाया।
लेकिन इस शिखर सम्मेलन में राजनीतिक और कूटनीतिक बातों से परे इंसानियत की जो मिसाल अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाह्यान ने पेश की, वह वाकई सीखने वाली है। हम सभी जानते हैं कि एक अच्छा इंसान बनने के लिए हमें दयालु और नरम दिल होना चाहिए। लेकिन शेख खालिद ने अपने व्यवहार से यह साबित कर दिया कि वाकई लदा हुआ पेड़ ही झुका हुआ होता है।
असल में, जब सम्मेलन पूरा हुआ और वह अपने देश लौट रहे थे, तो प्रोटोकॉल के तहत भारत सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी उन्हें विदा करने एयरपोर्ट पर मौजूद थे। विदा होने की औपचारिकताएं पूरी करने के बाद वह एयरपोर्ट के अंदर जा ही रहे थे कि अचानक मुड़े और ड्राइवर के पास पहुंचकर उसे धन्यवाद कहा। इसके बाद उन्होंने ड्राइवर से हाथ मिलाया और आगे बढ़ गए। इस छोटे-से व्यवहार का वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में आया।
छा गया यह अंदाज
प्रिंस का यह अंदाज इंटरनेट की दुनिया में छा गया। आप सोचकर देखिए कि अगर वह ऐसा नहीं भी करते तो क्या फर्क पड़ जाता? आखिर वह ड्राइवर अपनी ड्यूटी ही कर रहा था। लेकिन हां, काम और ड्यूटी से परे एक चीज होती है—इंसानियत और अच्छा व्यवहार। वह यहां इस छोटी-सी बात में नजर आया।
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और सख्त सुरक्षा नियमों के बीच किसी महत्वपूर्ण पद पर बैठे व्यक्ति का एक साधारण चालक के प्रति ऐसा सहज सम्मान दिखाना लोगों को खासा पसंद आया। अगर इस बात को देखें तो वह एक ऐसा लम्हा था, जो लोगों के लिए मिसाल बन गया। अगर वह ड्राइवर को थैंक यू नहीं भी कहते तो शायद इसे कोई नोटिस भी नहीं करता। लेकिन उनका यह शिष्टाचार बता गया कि सम्मान देने के लिए किसी बड़े पद की जरूरत नहीं होती।
जिंदगी परीक्षा लेती है, लेकिन...
जिंदगी में मेहनत करने वालों की अपनी एक दुनिया है। एक मेहनतकश जिंदगी जीना आसान नहीं है। लेकिन अगर हम गहराई में देखें तो समझ पाएंगे कि जब आपके पास पैसा, दौलत और शोहरत सब कुछ होता है, ऐसे में इंसानियत का धर्म निभाना भी एक तरह की परीक्षा बन जाता है।
जब आपके पास शोहरत और शक्ति होती है तो दंभ और अकड़ का आ जाना स्वाभाविक तौर पर देखने को मिलता है। यहां तक कि एक कड़वी लेकिन सच बात है कि जब लोग अफसर बन जाते हैं तो कई बार घर में भी अपने अफसर होने की प्रवृत्ति को छोड़ नहीं पाते। उनके आसपास के लोग ही बहुत डरे-डरे घूमते हैं।
आप इस बात को अन्यथा न लें। हम यह बात सभी के लिए नहीं कह रहे हैं। लेकिन हां, यह बात बहुत लोगों पर लागू होती है। लोग पद पर पहुंचकर अपनी प्रवृत्ति बदल लेते हैं।
सादगी आसान नहीं होती
बहुत कम ऐसे लोग होते हैं जो अपने पुराने अंदाज में खुद को रख पाते हैं। यह सच है कि सफलता और पावर आपकी परीक्षा लेती है, लेकिन उसमें पास होना इतना आसान नहीं है। ऐसा इसलिए क्योंकि सादगी को अपनी जिंदगी में आत्मसात करना आसान नहीं होता।
ऊपर देखना हमेशा अच्छा लगता है और जब ऊपर बैठकर नीचे की दुनिया देखते हैं तो सभी लोगों को नहीं, लेकिन बहुत लोगों को शक्ति का चश्मा पहनकर सब कुछ छोटा और तुच्छ नजर आने लगता है।
लेकिन जिंदगी रूपी पाठशाला की एक बात अच्छी है कि आप अपनी गलती को सुधारकर उसे दोबारा सही कर सकते हैं। वैसे भी ऐसा कहा जाता है कि इंसान को अगर आप सही तरीके से जानना चाहते हैं तो यह देखिए कि वह अपने मातहत लोगों से कैसे बात करता है।
हमारा कुछ नहीं बिगड़ता
आप कुछ बॉसेज का ही उदाहरण ले सकते हैं। कुछ बॉसेज होते हैं जिन्हें आपके सिर्फ काम से मतलब होता है। आप किस दौर से गुजर रहे हैं, यह उनकी समस्या नहीं होती। उनका फोकस अपना टारगेट होता है।
बेशक मैं भी मानती हूं कि जिंदगी में प्रोफेशनलिज्म होना चाहिए, लेकिन इंसानियत से ऊपर उठकर नहीं। अगर किसी से थोड़ा-सा प्यार से बात कर लें, किसी के कंधे पर अपना हाथ रख दें तो हमारा कुछ बिगड़ नहीं जाएगा। बल्कि दुनिया को पता चलेगा कि तहजीब के मायने क्या होते हैं।
शेख खालिद का ड्राइवर को धन्यवाद कहना भी ऐसा ही एक छोटा-सा व्यवहार था। लेकिन कई बार छोटी-सी बात ही इंसान के व्यक्तित्व की बड़ी तस्वीर दिखा देती है। पद बड़ा हो सकता है, लेकिन किसी के प्रति सम्मान दिखाने के लिए दिल बड़ा होना जरूरी है।
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