अब शादियों का सीजन हमारे हिंदुस्तान में आने को तैयार है। हम भारतीय अपनी बेटियों को स्त्री धन के तौर पर सोने के जेवर देते आए हैं। ये जेवर उन्हें सशक्त करते हैं और किसी मुसीबत के वक्त वो इनका इस्तेमाल भी कर सकती हैं। रही बात सजने संवरने की तो सच है कि सोने के जेवरों का अपना एक ऑब्सेशन है। लेकिन एक बात यह भी सच है कि चाहे किसी के पास कितना भी सोना क्यों ना हो, उसके मन में एक लालसा बनी रहती है। इसकी वजह क्या है? क्या यह वाकई में बेहतरीन है? क्या सच में महिलाएं अपने आड़े वक्त में इसका इस्तेमाल अपने लिए कर पाई हैं?
लेकिन सबसे बेहतरीन कुछ और है
बेशक सोना एक बहुत मूल्यवान धातु है। इसके बने गहने न केवल खूबसूरत लगते हैं बल्कि वे कीमती भी होते हैं। लेकिन फिर भी यह स्त्री के लिए सबसे बेहतरीन जेवर नहीं है। सबसे कीमती जेवर अगर है तो वह तालीम है। अगर आपके पास यह है तो जिंदगी में चाहे कितनी भी मुसीबत क्यों ना आ जाए, यह आपको जीने का एक हौसला देती है। यह जेवर आपको हमेशा आपके वजूद के होने का एहसास दिलाता है। जब यह आपके पास होता है तो आपके अंदर का एक ‘मैं’ हमेशा मौजूद होता है। आप इसे पहनकर सिर उठाकर चल सकती हैं।
संचय करने की एक उम्र होती है
वैसे तो आप पढ़ाई किसी भी उम्र में कर सकते हैं, लेकिन अगर आप अपने जीवन में आगे बढ़ना चाहती हैं, कुछ करना चाहती हैं, तो अपने जीवन में पढ़ाई को बहुत अहमियत दीजिए। यह सिर्फ लड़कियों की बात नहीं है, उनके पेरेंट्स के लिए भी है। वो अपनी बेटियों को इस जेवर को संजोने में उनकी मदद करें। वो जो कोर्स करना चाहती हैं उन्हें वो करने दिया जाए। उन्हें अपने पैरों पर खड़ा होने में उनकी मदद करें। जब वो अपनी डिग्रियां लेकर ससुराल पहुंचेगी तो न केवल वो अपने अधिकारों के लिए सजग होगी बल्कि वो डिजास्टर मैनेजमेंट में भी माहिर हो जाएंगी। अगर वो शादी के बाद किसी परेशानी में भी होंगी तो उन्हें एहसास होगा कि हर प्रॉब्लम का सॉल्यूशन होता है। यह जेवर उन्हें कभी बेबस महसूस होने नहीं देगा।
वो अधिकारों को जानती है
हम यह नहीं कह रहे कि आप सोने के जेवर न खरीदिए, अपनी बेटियों को न दीजिए। लेकिन इन जेवरों से भी कीमती जेवर उसकी एजुकेशन है। इसमें कोई कमी न रहने दीजिए। अगर उसके पास एजुकेशन होगी तो ही वो इस स्त्री की अहमियत को समझ पाएगी। कितनी ही स्त्रियों को मैं जानती हूं जिनके पास सोने के नाम पर बहुत कुछ है, लेकिन उसका इस्तेमाल वो कैसे कर सकती हैं, इसके बारे में उन्हें कुछ भी नहीं पता। लेकिन अगर एजुकेशन होगी तो वह न केवल सोने के निवेश के बारे में जान पाएंगी, बल्कि अपने सोने के जेवरों में भी अपने बलबूते पर बढ़ोतरी कर पाएंगी।
खुद से करें वादा
अब लड़कियों को खुद से वादा करना होगा कि वो तालीम के जेवर से खुद को सजाएं। अपने माता पिता से ज़िद करें, उन डिग्रियों को हासिल करने की जिनका अरमान उन्हें है। याद रखिए कि जीवन में परेशानियां तो सभी के आती हैं, लेकिन एक एजुकेटेड इंसान अपनी पढ़ाई से वो नज़रिया पा लेता है, जहां उसे संकट रूपी काले बादलों में उम्मीद की किरण झिलमिलाती नज़र आती है।
वैसे भी आप विश्वास करें, जब आप तालीम रूपी जेवर से सजकर अपने ससुराल पहुंचती हैं, तो आपके पास एक विश्वास मौजूद होता है खुद पर कि मैं कर लूंगी। हम भी चाहते हैं कि आपकी बेटियां अपने ससुरालों में राज करें। वो इतनी खुशियां पाएं जितनी कि आपने कल्पना भी नहीं की हो। लेकिन याद रखिए, एक पढ़ी लिखी लड़की चाहे वो आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो या नहीं, जानती है अपने अधिकारों और अपने कर्तव्यों के बीच तालमेल बिठाना। वो जानती है कि वो अपने आप में सशक्त है, बेचारी नहीं है। वैसे भी जब इंसान को अपने ‘मैं’ का एहसास हो जाता है तो उसके आसपास के लोगों को भी इसका प्रभाव नज़र आता है।
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