आप कुछ भी कहते और करते रहिए, हिंदुस्तान अमन का पैगाम लिखता रहेगा

आप कुछ भी कहते और करते रहिए, हिंदुस्तान अमन का पैगाम लिखता रहेगा

दिल्ली की जामा मस्जिद, जुमे की नमाज के बाद नमाजी अपने घर लौटने की तैयारी में थे, तभी एक ऐलान हुआ कि एक बच्ची बहुत बीमार है और उसे इलाज के लिए मदद की जरूरत है। अमूमन मस्जिद में इस तरह के ऐलान होते हैं। लेकिन इस ऐलान ने और उसके बाद जो हुआ, उसके लिए इंसानियत की एक मिसाल पेश कर दी। आज जामा मस्जिद का यह वीडियो वायरल है, जो बता रहा है कि इंसानियत का कोई मजहब नहीं होता। और यह बात भी कि आप कुछ भी कहते और करते रहिए, लेकिन हिंदुस्तानी अमन का पैगाम लिखते रहेंगे।

तो क्या है वो कहानी?

दरअसल, एक महिला इलाज के लिए फिलहाल दिल्ली आई है। इनकी छोटी-सी बेटी स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी नाम की एक गंभीर बीमारी से पीड़ित है। इस बीमारी के इलाज के लिए मां को 9 करोड़ रुपए की जरूरत थी। यह मां कुछ लड़कों को एम्स के बाहर मिली। जाहिर-सी बात है कि वह परेशान थी और चाह रही थी कि किसी तरह बच्ची के इलाज के लिए पैसे इकट्ठे हो जाएं।

इन लड़कों ने इस मां की परेशानी को हल करने की कोशिश की। दिल्ली की जामा मस्जिद में जुमे की नमाज में काफी भीड़ होती है। स्थानीय लोगों के साथ सैलानी भी यहां मौजूद होते हैं। बस, ये लड़के कुछ सोच-विचार करके इस मां को जुमे के दिन जामा मस्जिद लेकर आ गए।

मस्जिद में ऐलान हुआ और इस ऐलान के बाद साबित हो गया कि आंसुओं का कोई मजहब नहीं होता।

6 करोड़ 33 लाख की मदद

और नमाज के बाद जो हुआ, बता दिया कि वाकई अभी इंसानियत जिंदा है। ऐलान सुनने के बाद जिससे जो बन पड़ा, उसने किया। किसी ने जेब में जितना था, उसने पूरी रकम दे दी, तो किसी ने पैसों के साथ बच्ची को बेशुमार दुआएं दीं।

माथे पर बिंदी और सिंदूर सजाए इस महिला और गोद में बैठी हुई उसकी बेटी से किसी ने भी न नाम पूछा, न जात पूछी और न ही यह जानने की कोशिश की कि वह कहां से आई है। लोगों ने दिल खोलकर दान किया। मस्जिद से उस दिन 6 करोड़ 33 लाख रुपए की फंड रेजिंग हो गई। जाते-जाते नमाजी उस बच्ची को दुआ भी दे रहे थे कि वह जल्दी से ठीक हो जाए।

सोचकर देखिए जरा कि हमारा हिंदुस्तान कितना खूबसूरत है। कितनी भी नफरत भरा माहौल क्यों न बन जाए, लेकिन दर्द पर मलहम इंसानियत का ही लगता है।

मस्जिद में एक मां आई थी

दिल्ली के सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर सनी महौर ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर अपनी तरफ से इस महिला के लिए एक छोटी-सी कोशिश की। लेकिन वो कहते हैं न, अगर आप कुछ अच्छा काम करने चलते हो तो कड़ी से कड़ी मिलती है और लोग एक-दूसरे के साथ खड़े हो जाते हैं।

अगर हम बहुत पैसे वालों की भी बात करें तो 9 करोड़ रुपए कोई मामूली रकम नहीं है। लेकिन जब आप मिलकर कुछ करते हो और ठान लेते हो, तो लगता है कि चीजें मुश्किल हो सकती हैं, लेकिन नामुमकिन नहीं।

अभी भी इलाज के लिए कुछ और करोड़ की जरूरत है। बस खुशी इस बात की है कि मस्जिद में एक मां आई थी। उम्मीद करते हैं कि इस बच्ची के इलाज के लिए पूरे पैसे जल्द से जल्द इकट्ठे हो जाएं।

यह कुछ कहानी जैसा लगता है

अगर हम इस पूरी घटना को देखते हैं तो लगता है जैसे कोई कहानी-सी है। बस यह दुआ है कि वो छोटी-सी बच्ची, जो एक गंभीर बीमारी से लड़ रही है, वो जल्दी से जल्दी ठीक हो जाए। ऊपर वाला उसे खूब सेहत और खुशियों के साथ जिंदगी गुजारने का मौका दे।

मदद के हाथ ऐसे बच्चों के पास जरूर पहुंचें, जो पैसे की कमी की वजह से अपना इलाज नहीं करवा पाते हों। सोचिए कि पैसे के बिना कोई मां-बाप इलाज नहीं करवा पा रहे, उससे बढ़कर बेबसी और लाचारी मां-बाप की क्या ही होगी।

इस बच्ची के वीडियो सोशल मीडिया पर इस समय काफी वायरल हैं। आप भी सोशल मीडिया पर जाइए। देखिए, आप किस तरह अपना योगदान दे सकते हैं। जिंदगी कभी-कभी कुछ अच्छा करने का मौका देती है। इस मौके को हाथ से मत जाने दीजिए।

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