क्या सच में भारत का कॉरपोरेट कल्चर बदल रहा है?

क्या सच में भारत का कॉरपोरेट कल्चर बदल रहा है?

हम सभी लोग जो नौकरी करते हैं वो इस बात को जानते हैं कि ऑफिस में काम करना जितना आसान है उतना ही मुश्किल है कंपनी की ओर से दी गई छुट्टी को लेना। हालांकि साल में कुछ तय पेड लीव्ज़ हर कंपनी देती है। लेकिन इन छुट्टियों को ले पाना हर किसी के बस की बात नहीं। बहुत लोगों को देखा है कि वो बुखार-जुकाम में छुट्टी नहीं मिल पाने की वजह से परेशान होते हैं। वहीं कुछ लोग जो मैन्युपुलेट करने में माहिर होते हैं, वह छुट्टी लेने का कोई जुगाड़ लगा ही लेते हैं। वो न जाने कितनी बार दादी-नानी के बीमार होने का झूठा बहाना बनाते हैं। तो कई बार वो अपनी ही किसी गंभीर बीमारी का बहाना बनाकर छुट्टी लेने का जुगाड़ बना लेते हैं। लेकिन अब शायद सच बोलकर छुट्टी लेने की गुंजाइश कंपनी भी देने को तैयार है।

सर मेरा ब्रेकअप हो गया

हम सब जानते हैं कि उम्र का एक दौर होता है जब लोगों के बीच में प्यार होता है। वे लोग जो ऑफिस में काम करते हैं वो भी इंसान ही हैं। ऐसे में किसी के साथ अफेयर चलना या ब्रेकअप हो जाना एक आम बात है। लेकिन हाल ही में एक वीडियो वायरल हुआ था जब एक कर्मचारी ने अपने बॉस को छुट्टी की एप्लीकेशन दी थी और उसमें उसने लिखा था कि सर मेरा ब्रेकअप हो गया है और मैं मेंटली अनस्टेबल हूं और मुझे मेंटल पीस पाने के 10 दिन की छुट्टी चाहिए। बात इतनी खूबसूरत थी, इतनी भोली थी। वह चाहता तो बहुत कुछ कह सकता था, वह कोई बहाना बना सकता था लेकिन उसने सच बोला और उसके सच को इज़्ज़त दी गई। उसकी बॉस ने उसकी 10 दिन की छुट्टी अलॉट की। अब आप खुद सोचिए कि एक इंसान जिसे एक ब्रेकअप हुआ है क्या वह इस काबिल होगा कि वह काम कर पाए? उसका मन तो वैसे ही दुखी और टूटा हुआ है, वह वैसे भी ऑफिस में प्रोडक्टिव तो रहेगा ही नहीं। तो ऐसे में अगर वह स्वयं को रिलैक्स करना चाह रहा है, अपने आप को स्टेबल करना चाह रहा है और उसके पास उसकी ही छुट्टी है और वह झूठ नहीं बोलकर सच बोलकर छुट्टी ले रहा है तो उसमें परेशानी क्या है। यह एक नई चीज़ थी। इस चीज़ को बहुत अप्रिशिएट किया गया। यहां तक कि बॉस को भी लोगों ने बहुत अप्रिशिएट किया। लोगों ने कमेंट करके लिखा कि अगर इस तरह की बॉस रहेंगे तो लोग बहाने नहीं करेंगे बल्कि जब वह अपने काम पर लौटेंगे तो और ज़्यादा प्रोडक्टिव बनकर लौटेंगे।

अधिकार जानिए तो कर्तव्य भी हैं

यह अच्छी बात है कि जेन ज़ी के आने के बाद कॉरपोरेट ऑफिस में माहौल बदला है। लोग अब सांस लेने लगे हैं। इसकी वजह है कि जेन ज़ी अब कर्मचारी बनकर ऑफिस में मौजूद है। यह वो जनरेशन है जो कि अपने अधिकारों के बारे में बहुत अवेयर है। इन्हें अपनी बात रखनी आती है लेकिन इस बात को भी याद रखा जाना चाहिए कि अगर आप अधिकारों के लिए सजग हैं तो अपनी जिम्मेदारियों के प्रति भी आपको अवेयर होना होगा। अगर आप एक प्लांड और लंबी छुट्टी ले रहे हैं तो इस बात को भी जानें कि ऐसा तो नहीं कि कंपनी को आपकी छुट्टी लेने से कोई नुकसान होगा। जब आप नहीं होंगे तो काम की जिम्मेदारी कौन संभालेगा?

बैलेंस बनाना होगा

यह प्रकृति का नियम है कि हर चीज़ संतुलन में ही अच्छी लगती है। अगर आप किसी कंपनी में काम करते हैं तो अपनी जिम्मेदारियों से मुंह ना मोड़ें। कंपनी अगर आप पर भरोसा करती है तो वह भरोसा भी टूटना नहीं चाहिए। ऐसा भी नहीं होना चाहिए कि आपकी दुनिया आपके ऑफिस के अलावा और कुछ ना हो और ऐसा भी नहीं होना चाहिए कि हर हफ्ते आप ऑफिस से किसी ना किसी वजह से छुट्टी लेते रहें और आपका काम बाधित हो।

यह समय संभलने का है

कॉरपोरेट अपने कर्मचारियों के लिए आजकल बहुत कुछ कर रहे हैं। वो अगर आपके लिए थोड़ा कंसर्न्ड हैं तो एक कर्मचारी होने के नाते आपको एक पॉज़िटिव एटीट्यूड अपनाना चाहिए। याद रखिए अगर आप कंपनी को अपना टाइम देते हैं तो कंपनी भी आपको बहुत कुछ देती है। वहीं अगर कंपनियों के संदर्भ में बात करें तो शायद उन्हें भी अहसास हो चुका है कि यह वक्त बदलाव का है।

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