फ्लाइट का लेट होना किसी के हाथ में नहीं होता, लेकिन जब फ्लाइट डिले होती है तो हमारे हाथ में जो होता है यानी कि हमारे दुख-दर्द का साथी, अरे भई हमारा फोन, वो हमारी बोरियत को दूर करने के लिए किसी फरिश्ते की तरह हमारा समय कटवा ही देता है। सभी जानते हैं कि रील देखते-देखते कब घंटों बीत जाते हैं, पता ही नहीं चलता। लेकिन आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अब बोरियत से भरे इस मुश्किल वक्त में सिर्फ मोबाइल देखना ही एकमात्र विकल्प नहीं है। एयरपोर्ट पर आप किताब भी पढ़ सकते हैं। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया की ओर से देश के 68 एयरपोर्ट्स पर फ्लाइब्ररी की यह सुविधा शुरू की गई है। जहां आप बोर्डिंग के बाद एक किताब ले सकते हैं और जब गंतव्य पर उतरें तो यह किताब रख दें।
ईमानदारी पर किताबें
कहा जाता है कि जो लोग किताबों से दोस्ती करने वाले लोग बहुत साफ दिल और रचनात्मक प्रवृत्ति के होते हैं। लेकिन इस बार बात सच में केवल किताबों तक ही सीमित नहीं है। यह आपकी ईमानदारी का भी टेस्ट साबित होगा। आप जिस भी एयरपोर्ट से यात्रा करेंगे, उसके डिपार्चर टर्मिनल की शेल्फ से किताब को चुनें। इसके लिए आपसे कोई फीस नहीं ली जाएगी। ना ही आपकी कोई आइडेंटिटी या कार्ड मांगा जाएगा। बस आपको करना यह है कि अपने पूरे सफर के दौरान किताब को पढ़ें। जब आप एयरपोर्ट पर उतरें तो फ्लाइब्ररी शेल्फ में किताब को रख दें। अपनी तरह की इस अनूठी और सार्थक पहल की शुरुआत हो चुकी है। यह आपके भरोसे पर चल रही है। बकुल फाउंडेशन और एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया की ओर से फ्लाइब्ररी का यह इनिशिएटिव शुरू किया गया है।
दान भी कर सकते हैं
जो लोग भी लाइब्रेरी जाकर किताब पढ़ते थे, वो इस बात को जानते होंगे कि लाइब्रेरी में किताबें पढ़ने की सुविधा तो होती ही है। वहीं, आप चाहें तो किताबों को दान भी कर सकते हैं। यह सुविधा फ्लाइब्ररी में भी है। इस सुविधा को शुरू करने का उद्देश्य यात्रा को रोचक बनाने के साथ बुक रीडिंग की आदत को दोबारा डेवलप करना भी है। तो बस अब आप भी हो जाएं तैयार। मोबाइल को अपनी जेब में डालें। रील्स को देखना पॉज करें और किताबों के पन्नों से आती खुशबू से दोबारा दोस्ती कर लें।
भुवनेश्वर से हुई है शुरुआत
यह अपनी तरह का एक अनूठा प्रोजेक्ट है। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर इस प्रोजेक्ट की शुरुआत भुवनेश्वर से की गई थी। यह पहल यात्रियों को काफी पसंद आई थी। इसी का परिणाम है कि आज देश के 68 हवाई अड्डों पर यह फैसिलिटी मौजूद है। अक्सर आपको पढ़ने के बाद किताब को वापस अगले एयरपोर्ट पर रखना होता है। वहीं, कुछ एयरपोर्ट पर आपको किताब घर ले जाने की भी सुविधा होती है। लेकिन अगली बार जब आप यात्रा करें तो उसे संभालकर वापस लाएं और फ्लाइब्ररी की शेल्फ में रख दें।
शॉपिंग और खान-पान के साथ
फिलहाल बुक लवर्स इस सुविधा को खासा पसंद कर रहे हैं। हालांकि बहुत लोग किताब पढ़कर वापस कर रहे हैं, लेकिन प्रयागराज एयरपोर्ट पर 5 लोग किताब लेकर गए। उन्होंने उसे वापस नहीं लौटाया। लेकिन उम्मीद है कि धीरे-धीरे अवेयरनेस होगी और लोग इस किताब लौटाने को लेकर जिम्मेदार होंगे। रही बात एयरपोर्ट की सुविधाओं की, तो लोग एयरपोर्ट पर ड्यूटी-फ्री सामान, लाउंज और खान-पान का लाभ उठाते ही हैं। इस कड़ी में किताबों के माध्यम से एक सार्थक पहल हुई है। ऐसे में अगर आप एक बुक लवर हैं तो अब अपने बैग में किताब रखने की जरूरत नहीं है। आप एयरपोर्ट पर ही किसी एक किताब से दोस्ती कर सकते हैं। तो बस अब देर किस बात की। अपने किताबें पढ़ने के शौक को फिर से जीवंत करिए। अगर आप अकेले यात्रा कर रहे हैं तो आपको एहसास होगा कि किताबें सफर की कितनी बेहतरीन साथी हैं। इन्हें पढ़ने से ना केवल समय अच्छा कटेगा, आपकी नॉलेज में भी बढ़ोतरी होगी। तो अगली बार जब आप हवाई यात्रा की प्लानिंग करें तो एयरपोर्ट पर किताब लेना ना भूलें।
एक और बात का ख्याल रखना है कि किताब सिर्फ लेनी नहीं है, उसे अपनी पूरी जिम्मेदारी से वापस भी रखना है।
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