हाल ही में नया साल होकर गया है। नए साल पर सेलिब्रेशन बनता है। हम सभी ने अपने अपने स्तर पर इसे खूब सेलिब्रेट किया। ऐसा नहीं है कि न्यू ईयर सेलिब्रेशन कोई नया कॉन्सेप्ट है। लोग हमेशा से ही नए साल पर खुश होते और जश्न मनाते नजर आए हैं। लेकिन हां, बीते कुछ सालों में इसे सेलिब्रेट करने का अंदाज़ कुछ बदल सा गया है। अब न्यू ईयर में होटल में पार्टीज करना, पब्स में जाना आम लोगों की जिंदगी में भी आम हो चला है, लेकिन आप कुछ बातों को सोचिए जरूर।
क्या यह रेस है
आपको हो सकता है कि यह सवाल अजीब लगे। लेकिन एक बार इस बात को समझिए। आप सोचिए कि जिस अंदाज से आप सेलिब्रेट करने लग गए हैं, क्या यह वाकई में आपको खुशी देता है या आप दूसरे लोगों की देखा-देखी ऐसा कर रहे हैं। अगर आप दूसरे लोगों की देखा-देखी ऐसा कर रहे हैं, तो आप लिखकर रख लें कि आप खुश हो ही नहीं सकते। आप बस एक धूम-धड़ाके की रेस में शामिल हैं। इस शोर वाली रेस में आपने खुद को और अपनी खुशियों को गुम कर दिया है।
लाइक्स पर डिपेंड खुशियां
आपने पार्टीज करते हुए अक्सर लोगों को देखा होगा कि वो उस मोमेंट को एंजॉय नहीं कर रहे होते। वो अपनी प्रेज़ेंस के सुबूत देते हैं वॉट्सऐप स्टेट्स पर। उन्हें फौरन इंस्टाग्राम पर भी अपडेट करना होता है और बताना होता है सोशल मीडिया पर कि वो फलानी जगह आकर कितने खुश और एक्साइटेड हैं और कितना एंजॉय कर रहे हैं। इस अपडेट के बाद उनका अगला टारगेट होता है कि उनके किन-किन अपनों ने यह स्टेट्स व्यू कर लिया है और कौन क्या कमेंट कर रहा है। इस पोस्ट और व्यू की गणित में उलझे हुए यह लोग अपने खुश रहने के जरिए को ही भूल जाते हैं।
तो फिर क्या करें
आप ज़रा थमिए और सोचिए कि आप खुद से क्या चाहते हैं? आपकी खुशी क्या है? आपके लिए सेलिब्रेशन का मतलब क्या है। हम आपको यह नहीं कह रहे कि आप पुराने ज़माने में चले जाएं। अगर आप एक पार्टी एनिमल हैं, पार्टी लवर हैं तो खूब नाचिए, गाइए, लेकिन साथ में मुस्कुराइए। लेकिन अगर आप एक प्राइवेट पर्सन हैं तो सेलिब्रेशन की रेस में शामिल होने के लिए ऐसा न करिए। अगर आप वर्कोहॉलिक हैं तो इस दिन खूब काम करके अपने दिन को मनाइए। अगर आप एक मूवी या वेबसीरीज लवर हैं तो फिल्म एंजॉय करिए। अगर आपको घूमने जाना पसंद है तो अपने वेकेशंस को प्लान करिए।
दिखावे की दुनिया से बाहर आइए
कुछ भी करें, बस आपने जो किया उसे खुद को एंजॉय करने तक सीमित करिए। यह आपके लिए है। दूसरे को मत दिखाइए। आप याद रखिए कि बहुत बार ये खुशियां आपकी अपनी हैं। बस दिखावे की दुनिया से बाहर आइए। जब आप इस दिखावे की दुनिया से बाहर आ पाने में कामयाब होंगे, तो आप अपनी जिंदगी में खुशियों की पगडंडी पर खुद-ब-खुद ही चलने लगेंगे। और फिर आपको अंदर से खुश होने से कोई नहीं रोक सकता। क्योंकि वो खुशी भी आपकी अपनी होगी और वो रास्ता भी।



