सुनो लड़कियों, अपने लिए स्टैंड आप ही को लेना होगा

सुनो लड़कियों, अपने लिए स्टैंड आप ही को लेना होगा

इन दिनों पाकिस्तानी सीरियल्स का काफ़ी क्रेज है। ज़ाहिर है कि मैं भी आजकल के इस क्रेज का हिस्सा हूं और इन दिनों एक-दो सीरियल देख रही हूं। ऐसे ही इन दिनों एक सीरियल ट्रेंड में था जिसका नाम था आस पास। यह सीरियल बेसिकली दो ऐसी लड़कियों और उनकी मां की ज़िंदगी पर केंद्रित था, जिनके पिता दूसरी शादी कर लेते हैं और उसके बाद उनकी बेटियां और पहली पत्नी एक संघर्षभरी ज़िंदगी गुज़ारने को मजबूर हो जाते हैं।

ख़ैर, यह सीरियल अब ख़त्म हो चुका है। लेकिन इसमें एक किरदार था, जिसका नाम था अलीना। बेसिकली इस किरदार को जिस तरह से पोर्ट्रे किया गया था, उससे अंदाज़ा होता था कि यूके में जॉब करने वाली एक फाइनेंशियली इंडिपेंडेंट, स्मार्ट वर्किंग वुमन है। लेकिन उसकी यह स्मार्टनेस अपने ससुराल वालों के सामने धरी की धरी रह जाती है। वह जॉब करती है, अपने पूरे घर को पालती है, लेकिन उसके ससुराल वाले उसे बातें सुनाने का कोई मौका अपने हाथ से जाने नहीं देते।

हद तो तब हो गई जब उसके ससुराल वाले उसे प्रेशर देते हैं कि वह अपने डॉक्टर भाई की शादी अपनी ननद से करवाए। लेकिन उसका भाई किसी और को पसंद करता था। अलीना जो कई सालों से इंडिपेंडेंट होने के बावजूद एक मजबूर ज़िंदगी जी रही थी, उसे लगता था कि उसे ससुराल वालों की हर बात माननी ही होगी। अगर उसने ऐसा नहीं किया, तो उसका नवाब हसबैंड उसे तलाक़ दे देगा।

लेकिन जब उसके भाई की बात आई और हालात कुछ ऐसे बने कि वह चाहकर भी अपनी ननद और अपने भाई का रिश्ता नहीं करवा पाई, तो उसे बहुत कुछ समझ में आया अपने बारे में। उसकी ननद जो उसे टॉर्चर कर रही थी, उसने ना केवल उसका मुक़ाबला किया, बल्कि अपने लिए भी स्टैंड लिया। वो जो डरती थी अपने रिश्ते को खो देने से, जब अपने लिए स्टैंड लेने में वह कामयाब रही तो उसके ऊपर हावी होने वाले उसके ससुराल उससे माफ़ी मांगते नज़र आए।

अलीना तो बस एक किरदार था

यह तो ख़ैर एक सीरियल था लेकिन अलीना के इस किरदार के ज़रिए उन बहुत सी शादीशुदा, सो-कॉल्ड इंडिपेंडेंट लड़कियों को एक सीख मिली होगी। आपको भी अपने आसपास ऐसी बहुत सी शादीशुदा इंडिपेंडेंट वर्किंग वुमन मिल जाएंगी, जिनके बाहरी आवरण को देखकर आपको लगेगा कि वाह, ज़िंदगी तो इनकी है। लेकिन नहीं, सिर्फ़ बाहरी आवरण नहीं, आपको थोड़ा गहराई में झांकने की ज़रूरत है। जब आप ऐसा करेंगे, तो बहुत सी लड़कियां आपको मिल जाएंगी जो नौकरी करके अपने पूरे परिवार को पाल रही हैं। वो भूल चुकी हैं कि उनके शौक क्या हैं? वो भूल चुकी हैं कि खुलकर, खिलखिलाकर वो कब हंसी थीं। वो घर जाती हैं तो काम उनके लिए तैयार मिलता है और ऑफिस में एक घड़ी उन्हें सांस लेने की फुर्सत नहीं मिलती।

ना उनकी नींद पूरी होती है और ना ही वो ठीक से खा पाती हैं। ज़िंदगी एक मशीन की मानिंद चलती है। लेकिन इस मशीनी ज़िंदगी को जीने के बावजूद उन्हें दबाया, धमकाया और डराया जाता है। अपने घर को बनाए रखने के लिए वह अपनी तरफ़ से हर मुमकिन कोशिश कर रही हैं। लेकिन ससुराल वालों के लिए वो एक एटीएम कार्ड से ज़्यादा कुछ भी नहीं हैं।

आवाज़ आपको उठानी होगी

जब भी हमारे आसपास ऐसी कोई लड़की दिखती है तो अफ़सोस करने के अलावा और कुछ हम कर नहीं सकते। वैसे भी दूसरा किसी के निजी मामले में क्या बोल सकता है। लेकिन आपजो इन सभी सिचुएशंस को भुगत रही हैं आप तो अपने लिए बोल ही सकती हैं ना? सिर्फ़ चुप रहकर अपनी आंखों के काले घेरों को कंसीलर से दबाना कोई हल नहीं है। उठिए और अपने अधिकारों को हासिल करिए। जितना आपके बस का है, आप बस उतना ही करिए। मना कर दीजिए। अपनी क्षमता का इम्तेहान मत लीजिए। जब कोई आप पर हंसे तो घुटिए मत चुपचाप। कह दीजिए साफ़-साफ़ अपने मन की बात। आपको जो भी पसंद है, नापसंद है, आप उसे कहिए। वैसे भी किसी भले आदमी ने कहा है कि जब-जब आप सहना नहीं छोड़ते, लोग कहना नहीं छोड़ते।

बात रखिए लेकिन सलीके से

हर बात को कहने का एक सलीका होता है। अगर आपको भी कुछ बुरा लगता है तो उसे कहने का आपको पूरी तरह से अधिकार है। लेकिन अपने हित में आप बात चाहे जो भी कहें, पूरी मज़बूती से लेकिन संयम के साथ रखें। अगर आप फाइनेंशियली इंडिपेंडेंट हैं तो इमोशनली स्टेबल होना भी सीखिए। इमोशनल होना कोई बुरी बात नहीं है, लेकिन अपने इमोशन का रिमोट किसी और को ना दें। जब आप खुद में मज़बूत होंगी तो आपके अंदर घर टूटने का डर भी ख़त्म हो जाएगा। लोग आपको डराते हैं आप डरिए मत, मज़बूत बनिए। घर ऐसे ही नहीं टूट जाता। दूसरों को सम्मान देने से पहले खुद को सम्मान देना आज ही से शुरू करें। जब आप खुद के लिए स्टैंड लेंगी, तो अपने लिए इज़्ज़त और ख़ुशी भी आप कमाने लगेंगी।

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