बाबिल संभलिए, यादों की पगडंडी पर जाइए और सीख लीजिए पिता इरफान खान से जीना और जीतना

बाबिल संभलिए, यादों की पगडंडी पर जाइए और सीख लीजिए पिता इरफान खान से जीना और जीतना

बॉलीवुड में नेपोटिज्म पर चर्चा बहुत होती है और इस समय यह चर्चा दोबारा से जोरों पर है। इसकी वजह है सोशल मीडिया पर इरफान के बेटे बाबिल खान का सोशल मीडिया पर लाइव आकर बॉलीवुड इंडस्ट्री के कुछ कड़वे सच के बारे में बताना। इस वीडियो में बाबिल बहुत बैचैन नज़र आ रहे थे। उन्होंने इस वीडियो में नेपोटिज्म के बारे में बात कही और बोला कि यह इंडस्ट्री बहुत फ़ेक है। इस वीडियो को मैंने भी देखा। ऐसा लग रहा था कि वो इमोशनल ब्रेकडाउन की स्थिति में हैं। यह सच है कि उन्हें अपनी मेंटल हेल्थ पर इस समय ध्यान देने की ज़रूरत है। खैर जैसा कि उम्मीद थी वो हुआ, यह वीडियो कुछ समय में ही उनके अकाउंट से डिलीट कर दिया गया और उनकी मां ने स्टेटमेंट जारी किया और अपने बेटे की मेंटल हेल्थ के बारे में बताया। उसके बाद बाबिल ने भी उस वीडियो के संदर्भ में सोशल मीडिया पर माफ़ी मांगी।

इरफान अगर होते तो

लेकिन कहीं ना कहीं यह वीडियो बहुत से सवाल खड़े कर गया। ऐसा लग रहा है कि बाबिल इस समय बहुत इमोशनली टूटे हुए हैं। सच भी है कि इरफान खान का यों असमय चले जाना जब उनके फैंस को ही इतना हैरान कर गया तो ज़ाहिर है कि उनके परिवार पर क्या बीती होगी। यह भी बात सच है कि अगर इस समय इरफान होते तो अपने बेटे के करिअर को शेप करने में उनकी मदद करते। हां, बाबिल इस समय इंडस्ट्री में अपनी जगह को बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने जिन भी फ़िल्मों में काम किया है, उन्हें उनमें काफ़ी एप्रिशिएट भी किया गया है। लेकिन ज़ाहिर है कहीं ना कहीं उन पर इरफान खान के बेटे होने का भी प्रेशर है। इरफान खान किस लेवल के कलाकार थे, वो हममें से किसी से छिपा हुआ नहीं है। लेकिन बाबिल, आप इरफान के बेटे होने के प्रेशर में क़तई भी ना आएं। आप जो हैं, जैसे हैं वैसे बने रहें। आप बस अपने काम पर फोकस करें।

वो सपनों की नगरी मुंबई से नहीं थे

बाबिल, इस दुनिया में एक ही चीज़ होती है मेहनत। चाहे कोई भी प्रोफ़ेशन क्यों ना हो, आपको बस लगे रहना पड़ता है। आप खुद को ही देख लीजिए। आप मानें या ना मानें लेकिन आपको भी इरफान खान के बेटे होने का फ़ायदा मिला है। इंडस्ट्री में बहुत लोग आपकी मेंटल हेल्थ को लेकर कंसर्न हैं। लेकिन बाबिल, यह वो समय है जब आपको अपने पिता की कहानी को दोबारा से जानना चाहिए। वो सपनों की नगरी मुंबई में पैदा नहीं हुए थे और ना ही उस दौर में जयपुर जैसी जगह पर, जहां वो बड़े हो रहे थे, एक्टिंग को लेकर बहुत ज़्यादा कोई एक्सपोज़र था। लेकिन जो मिला, जैसा मिला, उसमें उन्होंने अपना बेस्ट किया। जयपुर से अपने थिएटर की शुरुआत की। इसके बाद नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा गए और उसके बाद मुंबई। ज़ाहिर सी बात है कि उनका फेस कोई हीरो जैसा तो था नहीं, बस वो मेहनत से कभी पीछे नहीं हटे। शुरुआत में इंडस्ट्री ने उन्हें स्वीकार नहीं किया। लेकिन वो कहते हैं ना, जिसके पास कला होती है उसे कभी कोई रोक नहीं पाया। इरफान के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। हीरोगिरी के उस दौर में एक अभिनेता ने अपने सशक्त अभिनय से अपनी पहचान ना केवल बॉलीवुड में बल्कि हॉलीवुड में भी बना ली।

वो संघर्ष से नहीं घबराते थे। आख़िर तक उन्होंने संघर्ष किया। उन्हें जो कैंसर हुआ था वो काफ़ी ख़तरनाक था लेकिन उन्होंने अंत तक इस बीमारी से अपना संघर्ष जारी रखा। तो फिर बाबिल, आपको क्या हो गया? आप बेशक टूट गए हैं लेकिन कोई बात नहीं, आपको उठना ही होगा। खुद को समेटिए और संभालिए। एक नए सिरे से उम्मीद के दामन को कसकर दोबारा पकड़ लीजिए। आप खुद देखेंगे कि कैसे आपके जीवन में बदलाव आएगा। आप तो सपनों की नगरी मुंबई से हैं बाबिल। बस सपने देखिए, खूब देखिए और उन्हें अपना बनाने की रणनीति बना लीजिए। उठिए और मुस्कुराइए इरफान खान के फैंस उनके बेटे बाबिल को अभिनय करता हुआ देखना चाहते हैं।

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