अरिजीत सिंह से सीखिए हारी बाज़ी को जीतना और सिकंदर बनना

अरिजीत सिंह से सीखिए हारी बाज़ी को जीतना और सिकंदर बनना

हर साल की तरह इस साल भी 26 जनवरी की पूर्व संध्या पर पद्म अवॉर्ड की घोषणा हो चुकी है। इसमें तीन कैटेगरी में अवॉर्ड दिया जाता है पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री। यह अवॉर्ड अलग-अलग क्षेत्रों में योगदान देने वाले व्यक्तियों को भारत सरकार की ओर से दिया जाता है। इस बार भी कई विशिष्ट जन को अपनी अभूतपूर्व सेवाओं के लिए यह अवॉर्ड देने का ऐलान किया गया है। इन विजेताओं में 7 को पद्म विभूषण, 19 को पद्म भूषण और 113 हस्तियों को पद्म श्री अवॉर्ड से नवाज़ा गया है। देश की कुल 139 बड़ी हस्तियां इस लिस्ट में शामिल हैं।

कला जगत में अरिजीत सिंह को शारदा सिन्हा और ग़ज़ल गायक पंकज उधास के साथ यह अवॉर्ड मिला है। हालांकि पंकज उधास और शारदा सिन्हा दोनों को यह अवॉर्ड मरणोपरांत मिल रहा है। इन दोनों ही कलाकारों की कला से कोई भी अनजान नहीं है। शारदा सिन्हा ने जहां लोकगायिका के तौर पर खुद को स्थापित किया, वहीं पंकज उधास ने अपना पूरा जीवन ग़ज़ल को समर्पित किया। इन दोनों के बीच में हम अरिजीत के नाम और उनके टैलेंट को भी नकार नहीं सकते। बहुत ही कम उम्र में अरिजीत ने बॉलीवुड में स्वयं को स्थापित किया है।

फेम गुरुकुल का वो ज़माना

अरिजीत ने अपने करिअर की शुरुआत फेम गुरुकुल के साथ की थी। आज भी अरिजीत भोले-भाले और मासूम से दिखाई देते हैं और उस समय तो अरिजीत और भी चुपचाप और अपनी कला में गुम थे। उस समय दूसरे कंटेस्टेंट की भांति वो बहुत वोकल नहीं थे, लेकिन उन्हें पता था कि यह मंच उनके लिए सुनहरा मौका लेकर आएगा। और यहां मेंटर्स के बीच में वो अपनी कला को स्थापित करने में कामयाब भी रहे। इस समय बेशक वो विनर नहीं बने। कश्मीर के युवक काज़ी तौकीर उस समय जनता के हीरो के तौर पर उभरे थे और बाद में वो विनर चुने गए थे।

लेकिन हारे नहीं

बेशक वो बहुत कम वोटों की वजह से फेम गुरुकुल से जल्दी आउट हो गए थे, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। हालांकि उस वक्त टूटे बहुत थे। दोबारा खुद को समेटा और एक दूसरा रियलिटी शो 10 के 10 में हिस्सा लिया और इसे जीता भी। इसमें उन्हें 10 लाख की पुरस्कार राशि मिली थी। इस पैसे से उन्होंने अपना म्यूजिक स्टूडियो स्थापित किया और रेडियो, विज्ञापनों के लिए म्यूजिक कंपोजिंग शुरू की। उन्होंने अपना शुरुआती समय म्यूजिक प्रोग्रामर और प्रोड्यूसर के तौर पर बिताया।

संजय लीला भंसाली ने दिया ब्रेक

बॉलीवुड में उन्हें पहला ब्रेक संजय लीला भंसाली ने अपनी फिल्म सांवरिया के लिए दिया था। हालांकि किसी कारण से यह गाना फिल्म में नहीं लिया गया। इसके बाद साल 2011 में मर्डर 2 से उन्होंने अपना बॉलीवुड डेब्यू फिर मोहब्बत के साथ किया, लेकिन उन्हें सफलता मिली आशिकी 2 के साथ जिसमें उन्होंने गाना गाया था मेरी आशिकी तुम ही हो। इस गाने ने अरिजीत को एक सेलिब्रिटी का दर्जा दे दिया और उन्होंने फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा।

लेकिन ज़मीन को नहीं भूले

अरिजीत आज बेशक बॉलीवुड का एक जाना-माना नाम हैं, लेकिन वो अपनी जड़ों को नहीं भूले हैं। वो आज भी अपने गृहनगर में रहते हैं। वो अपने उसी पुराने पुश्तैनी मकान में रहते हैं जहां वे रहा करते थे। अपने घर के काम जैसे पास के बाज़ार से सब्ज़ी, दूध लाने का काम खुद करते हैं। कह सकते हैं कि एक सेलिब्रिटी होने के बावजूद भी वो एक सादा-सी ज़िंदगी जीते हैं। मात्र 37 साल की उम्र में पद्म श्री अवॉर्ड मिलना उनके लिए एक बड़ी उपलब्धि है। संगीत जगत और उनके फैंस के लिए यह एक गुड न्यूज़ है।

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