बहुत कम लोग होते हैं, जो अपनी शर्तों पर अपनी जिंदगी को जीते हैं। वो जो करना चाहते हैं, जैसे करना चाहते हैं, वो वैसा ही करते हैं। आप भी तो कुछ ऐसे ही थे नाना। आपके बारे में मशहूर है कि शूटिंग के दौरान आप कोई रीटेक नहीं दिया करते थे। यानी कि पहली बार में ही परफेक्ट होगा, यह आपको पता था। आपकी एक्टिंग इतनी इंटेंस और इतनी डीप होती थी कि वो शब्दों में बयां से बाहर की चीज है। आप हमेशा हैरान करने वाला एक कैरेक्टर रहे हैं। लेकिन आपकी मौत ने हैरान कर दिया है।
गोवा में अपने घर पर
खैर, जिंदगी में मौत से बड़ा सच और कोई भी नहीं है। दिल का दौरा पड़ने से नाना का निधन हो गया है। उनकी मृत्यु की पुष्टि उनके बेटे मल्हार पाटेकर ने की है। वे गोवा में अपने निवास पर थे। उनके साथ उनका केयरटेकर भी मौजूद था। कार्डियक अरेस्ट इतना गंभीर था कि घर पर ही बेहोश हो चुके थे। हालांकि अस्पताल ले जाकर उन्हें सीपीआर दिया गया, लेकिन वह रिवाइव नहीं कर पाए। गोवा के मणिपाल अस्पताल के ऑन्कोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. शेखर सालुंखे ने कहा कि हमारी एम्बुलेंस सुबह 4:20 बजे नाना पाटेकर के घर पहुंची। उनका घर हमारे अस्पताल के पास ही है। जब हम वहां पहुंचे, तो वे बेहोश थे। इसलिए हमारी टीम ने तुरंत सीपीआर शुरू कर दिया। लेकिन सुबह 5:20 पर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। अस्पताल लाए जाने तक उनकी मौत हो चुकी थी।
एक युग का अंत हो गया
नाना, आप अपनी तरह के एक अनोखे इंसान रहे। आप बेहतरीन अभिनेता थे। लेकिन मुंबई में मन नहीं लगा। मुंबई के लोखंडवाला में उनका एक 1 बीएचके का मामूली-सा घर है। लेकिन उनका मन पुणे के खडकवासला स्थित अपने 27 एकड़ के फार्महाउस और गोवा (डोना पाउला) में ज्यादा लगता था। वे यहां काफी समय बिताते थे। वे जमीन से जुड़े अभिनेता थे। वो बहुत चैरिटी करते थे। वो किसानों के बीच रहना पसंद करते थे। वो गांव में एक साधारण जीवन जीते थे।
1 करोड़ की कार का सपना
सूखे, आर्थिक तंगी और आत्महत्या से प्रभावित किसानों और उनके परिवारों की मदद के लिए कई बड़े काम किए। किसानों की मदद के लिए उन्होंने 1 करोड़ की अपनी कार का सपना छोड़ दिया। असल में वो अगले दिन 1 करोड़ की कार खरीदने वाले थे। तब शाम को वो टीवी देख रहे थे, जहां पता चला कि महाराष्ट्र में किसानों ने सूखे की वजह से आत्महत्या कर ली है। उस इंटरव्यू में उन्होंने महसूस किया कि अपने पति या पिता को खोने से ज्यादा दर्द तो गरीबी का है। बस इस अहसास के तहत उन्होंने फैसला किया कि करोड़ की कार खरीदकर क्या ही हो जाएगा। उन्होंने अपने दोस्त मकरंग को फोन लगाया, जो कि अभिनेता होने के साथ-साथ किसानों के हित के लिए एनजीओ भी चलाते हैं। इस तरह 1 करोड़ रुपए 1 हजार किसानों के परिवारों में चले गए। कार तो नहीं मिल पाई नाना को, लेकिन वो बहुत-सी दुआएं मिल गईं। इससे पता चलता है कि उनकी सोच की रेंज कहां तक थी। हाल ही में उन्होंने मुख्यमंत्री सहायता कोष में दो साल पहले दो करोड़ रुपए का फंड भी दिया था।
नहीं, आपकी मौत तमाशा नहीं है
क्रांतिवीर का आखिरी सीन है, जिसमें वो कहते हैं, “आ गए मेरी मौत का तमाशा देखने, मुझे लटका देंगे, मेरी आंखें बाहर आ जाएंगी।” इस सीन से पहले सच में नाना की तबीयत खराब हो गई थी। उनके सीने में दर्द की शिकायत थी। जब डॉक्टर ने उन्हें कहा था कि आप दो-तीन दिन का रेस्ट कर लो। तब उन्होंने कहा था कि अगर मैं आज मर गया, तो मेरा प्रोड्यूसर और डायरेक्टर कल मर जाएगा। हालांकि मेहुल कुमार खुद कह रहे थे कि कोई बात नहीं नाना, होने दीजिए नुकसान। रहने देते हैं। लेकिन नाना तो नाना हैं। जो वो सोच लेते थे, वो फाइनल होता था। उन्होंने कहा था कि हम जाकर कर लेते हैं। डॉक्टर भी शूटिंग पर साथ ही आया था।
ऐसा न जाने कितने किस्से हैं नाना, आपके। यकीन नहीं आ रहा कि आपको अब 'थे' लिखना पड़ रहा है। बॉलीवुड ने एक बेहतरीन एक्टर तो खोया है। लेकिन दुनिया ने एक अच्छा इंसान भी खो दिया। अक्सर लोग पैसे की चकाचौंध में यह देखना भूल जाते हैं कि किसी के घर में चूल्हा जल रहा है या नहीं। लेकिन आपके लिए लोगों और खासकर किसानों की जरूरतें हमेशा प्राथमिकता रही। आपकी मौत एक तमाशा नहीं, हैरान कर देने वाली घटना है।
अब आपके बारे में क्या कहें और क्या लिखें। फिलहाल आपको 'थे' लिखना ही अजीब लग रहा है। लेकिन हम आपको बता दें कि अब जब भी कभी आपकी याद आएगी, आपकी कोई फिल्म देख लेंगे। आपका कोई डायलॉग दोहरा देंगे। सच में अलबेले थे आप। आप जैसे लोग बहुत-कभी-कभी इस दुनिया में आते हैं। फिलहाल के लिए अलविदा नाना।
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