74 साल का नजर का सफर, जहां अनुभव की अंगुली थामकर इठलाते हैं डिजाइनर फ्रेम्स

74 साल का नजर का सफर, जहां अनुभव की अंगुली थामकर इठलाते हैं डिजाइनर फ्रेम्स

अगर हम पहले के दौर की बात करें तो उम्र बढ़ने के साथ लोगों की नजर कमजोर हो जाना आम हुआ करता था। लेकिन आज के इस दौर में पांच साल के बच्चे को भी चश्मा लगना आम हो गया है। वे लोग जो चश्मा पहनते हैं, वे जानते हैं कि एक अच्छे नजर के चश्मे के सही होने के मायने क्या होते हैं। आज के दौर में अगर देखें तो चश्मा सिर्फ आंखों की सेहत के लिए अच्छा हो, यह काफी नहीं है। शेड्स की बात तो छोड़ ही दीजिए। नजर का चश्मा भी ऐसा होना चाहिए, जो नजर को भी अच्छा लगे, साथ ही पहनने वाले की पर्सनालिटी में चार चांद लगा दे। अगर आप भी एक बेहतरीन चश्मे की तलाश में हैं और इसके साथ ही आपको कीमत भी मुनासिब चाहिए, साथ ही लेटेस्ट तकनीक और डिजाइन की भी दरकार है तो जयपुर में त्रिपोलिया बाजार स्थित इंडियन ऑप्टिकल्स आपके लिए बेहतरीन रहने वाला है। 1950 से स्थापित इंडियन ऑप्टिकल्स में अपने ग्राहकों की संतुष्टि का पूरा ध्यान रखा जाता है।

दस मिनट में चश्मा है तैयार

आंखों की जांच के लिए यहां लेटेस्ट तकनीक का इस्तेमाल होता है। जापानी तकनीक से युक्त कंप्यूटरीकृत आंखों की जांच यहां निशुल्क है। सबसे बड़ी बात है कि आपके पास टाइम नहीं है और इन सभी कामों में भी ज्यादा समय नहीं लगता। इनका वादा है कि दस मिनट में चश्मा तैयार करके हाथों में दे देंगे। इनके चश्मों में आपको क्वालिटी, कंफर्ट और स्मार्टनेस तीनों ही चीजें देखने को मिलती हैं। क्या आप सोच सकते हैं कि दस मिनट में तो मैगी भी नहीं बन पाती, तो फिर चश्मा कैसे? लेकिन सच में ये लोग ऐसा मुमकिन कर रहे हैं।

लेंस का भी है एक चार्म

74 साल से शहर में अपनी सेवाएं देना मामूली बात नहीं है। बदलते वक्त के साथ इन्होंने तकनीक का हाथ भी थामा है। लेकिन सबसे बड़ी बात, जो शुरुआती दौर में थी और आज भी है, वह है कि ग्राहक की संतुष्टि से बढ़कर कुछ भी नहीं है। यहां सिर्फ नजर के चश्मे ही नहीं, बल्कि शेड्स की भी वाइड वैरायटी मौजूद है। इन लोगों का कहना है कि हमारे पास ऑप्शंस की भी कोई कमी नहीं है। अगर आप यहां आते हैं तो कम से कम तीन चश्मे तो लेकर ही जाएंगे।

इसे वाकई साख कहते हैं

यह बात सच है कि बिजनेस में माना जाता है कि ग्राहक से बढ़कर कुछ नहीं होता। अगर आप उसका विश्वास जीतते हैं तो साख स्वयं बन जाती है। इनके कस्टमर्स ने इस बात को साबित किया है। वे लोग जो काम के सिलसिले में या किसी और कारण से दूसरे शहर या विदेश में रहते हैं, वे लोग बहुत सारे चश्मे इनसे बनवाकर लेकर जाते हैं। साल-दो साल में आने वाले लोग पांच से छह चश्मे आराम से बनवाकर ले जाते हैं। यह सब कुछ ऐसे ही नहीं हो जाता। इसके लिए बहुत मेहनत की दरकार है। आज के दौर में इस तरह की साख का बनना वाकई मिसाल है।

तकनीक के साथ जेब का भी ध्यान

यहां आपको लेटेस्ट तकनीक और डिजाइन से भरपूर चश्मे, लेंस और आंखों की जांच की सुविधाएं मिलेंगी। यहां तक कि आपको स्मार्ट ग्लासेज, ब्लूटूथ ग्लासेज भी मिलेंगे, जिनमें चश्मे को लगाए रखकर ही बात भी कर सकते हैं। आप रिकॉर्ड भी कर सकते हैं। लेकिन यहां इस बात का भी ध्यान रखा जाता है कि चश्मों की पहुंच आम आदमी की जेब तक भी रहनी चाहिए। यही कारण है कि 400 रुपए में भी आपको एक बढ़िया क्वालिटी का चश्मा और एक खूबसूरत स्टाइलिश फ्रेम मिलेगा।

स्पोर्ट्स सनग्लासेज अगर हैं पसंद

स्पोर्ट्स सनग्लासेज की तो अपनी एक अलग ही वाइब होती है। क्रिकेटर विराट कोहली और महेंद्र सिंह धोनी के स्पोर्ट्स सनग्लासेज आपको पसंद हैं तो उन्हीं के स्टाइल से प्रेरित स्पोर्ट्स सनग्लासेज की वाइड रेंज यहां मौजूद है। इसके अलावा बच्चों के लिए भी ग्लेयर्स की वैरायटी आपको पसंद आने वाली है। इन सभी में आपको एक से बढ़कर एक डिजाइन और स्टाइल पसंद आने वाले हैं। अगर आप स्पोर्ट्स लवर हैं तो इंडियन ऑप्टिकल्स की यह वैरायटी एक बार आपको ट्राई जरूर करनी चाहिए।

यह शॉप सुबह दस बजे खुलती है और रात को 11 बजे तक ओपन रहती है। अगर आप लंबे समय तक स्क्रीन पर काम करते हैं, कंफर्ट और स्टाइल दोनों को पसंद करते हैं तो आप यहां आकर अपने लिए स्टाइलिश फ्रेम और कंफर्टेबल आईवेयर को चुन सकते हैं। इनके ग्राहक सिर्फ शहर तक ही सीमित नहीं हैं। राजस्थान के अलग-अलग शहरों से लोग इनके पास आते हैं। इनके ब्लू-कट और कंप्यूटर लेंस की रेंज खासकर उन लोगों को बहुत पसंद आती है, जिनका स्क्रीन टाइम बहुत ज्यादा होता है। वहीं अगर शेड्स की बात करें तो ट्रेंडी और ब्रांडेड एक से बढ़कर एक वैरायटी आपको अपने मोहपाश में बांध लेगी। यहां आकर आपको पता चलेगा कि बचपन से पचपन तक के लोगों के लिए इनके पास ऑप्शंस की कोई कमी नहीं है।

यह शॉप भले ही 74 साल पुरानी है, लेकिन यहां आप समझ सकते हैं कि अनुभव और नई तकनीक कैसे एक-दूसरे का हाथ थामकर आगे बढ़ती है।

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