जयपुर आने का कर रहे हैं प्लान, जानिए इस शहर से जुड़ी कुछ खास बातें

जयपुर आने का कर रहे हैं प्लान, जानिए इस शहर से जुड़ी कुछ खास बातें

जयपुर वह शहर जिसकी फ़िज़ा में एक अजीब सी रोमानियत है, जिसकी फ़िज़ा में आपको संस्कार नज़र आते हैं, मोहब्बत और ख़ुशियां नज़र आती हैं। अगर आप भी इस सर्दियों में जयपुर आ रहे हैं तो जानिए इस शहर से जुड़ी कुछ खास बातें जो आपके इस सफर को और भी खूबसूरत बनाएंगी। इस शहर की बात करें तो वाकई में यह बहुत ही खूबसूरत सा शहर है। यह शहर जितना नया है उतना ही पुराना है। यह शहर जितना मॉडर्न है उतना ही पारंपरिक है। आज भी आपको जयपुर शहर में संयुक्त परिवार देखने को मिलते हैं, वहीं आपको जयपुर में न्यूक्लियर फैमिलीज़ भी नज़र आती हैं। हां, लेकिन जयपुर की जो सबसे बड़ी बात है परंपरा के साथ नए को जोड़ने की कड़ी यह चीज़ जयपुर को बहुत अलग बनाती है।

अभी नया ही है जयपुर

तो चलिए बात करते हैं सबसे पहले जयपुर के इतिहास की। महाराजा सवाई जयसिंह ने साल 1727, 18 नवंबर के दिन इस शहर की स्थापना की थी। एक राजा ने अपने सपनों का शहर बनाया था। हुआ यूं कि आमेर के राजा को अपने नगर का विस्तार करना था, उन्होंने जयपुर को चुना। अब राजा चूंकि बहुत क्रिएटिव थे तो उसी हिसाब से उन्होंने अपनी क्रिएटिविटी के सारे रंग इस शहर में डाले। इसे एक प्लान्ड सिटी बनाया गया। ऐसा नहीं था कि लोग आते गए और शहर बसता गया। राजा और राजशाही को गए हुए भले ही जमाने बीत गए हों, लेकिन आज भी आपको राजा की यह प्लानिंग हर गली और चौराहे पर नज़र आती है। पुराने शहर का गुलाबी रंग इसकी पहचान कल भी था और आज भी है।

हेरिटेज सिटी में आपका स्वागत है

यूनेस्को ने साल 2019 में इस शहर को हेरिटेज सिटी का दर्जा दिया है। इसके अलावा इस शहर में ऐसी कई इमारतें हैं जो वर्ल्ड हेरिटेज साइट में शामिल हैं। अगर शहर की पहचान की बात करें तो आज भी इस शहर का सबसे बड़ा प्लस पॉइंट इसके किले, महल और हवेलियां हैं। यहां पर रहने वाले लोग बदलाव को अपनाते हैं लेकिन खुद को बदलकर नहीं। वो अपनी जड़ों के साथ मजबूती से खड़े हैं। यही वजह है कि यह सिटी हेरिटेज सिटी बन पाई है। यहां आपको बहुत से मॉल मिलेंगे, लेकिन अगर आप यहां के स्टारबक्स में जाएंगे तो आपको सिर्फ कपल्स ही नहीं बल्कि पूरा परिवार एक साथ कॉफी पीता भी नज़र आएगा। यही तो है इस शहर का रंग और यही इसकी यूएसपी है।

वो नई पुरानी के साथ हैं

जयपुर की नई पहचान के रूप में वर्ल्ड ट्रेड पार्क, पत्रिका गेट, जवाहर सर्कल हैं। पुराने शहर के साथ नया शहर विस्तार पा रहा है। लेकिन ऐसा लगता है जैसे दोनों साथ में हमजोली हैं। बेशक जयपुर का पहला मॉल सांगानेरी गेट के पास सरावगी मेंशन था, लेकिन नए मॉल कल्चर के साथ भी इस शहर ने दोस्ती कर ली है। आज भी लोग सरावगी मेंशन चूड़ियां और आर्टिफिशल ज्वेलरी लेने जाते हैं। आप जयपुर जा रहे हैं तो शॉपिंग करेंगे। ऐसे में बापू बाजार जब आएं तो सरावगी मेंशन आना ना भूलिएगा। वहीं लाइफ स्टाइल मॉल, सिटी पल्स में भी फुटफॉल कुछ कम नहीं। इस शहर में मेले भी सेलिब्रेट किए जाते हैं और हैलोवीन पार्टी का कल्चर भी शहर अपना रहा है।

वो सभी के साथ वाली बात

इस शहर में सिर्फ उन्हीं लोगों का मन नहीं लगता जो इस शहर में पैदा हुए हैं। बल्कि यह शहर उन लोगों को भी अपना बना लेता है जो नौकरी या किसी काम की वजह से जयपुर आकर बसे हैं। यह शहर आपको कभी आउटसाइडर होने का अहसास नहीं होने देता। बल्कि अगर आप अपने साथ कुछ अच्छा लेकर आते हैं तो यह भी यहां स्वीकार है। शायद यही वजह है कि अब अलसुबह जयपुर में सिर्फ कचौरी और जलेबी नहीं मिलती, बल्कि अब पोहे और ढोकले जैसे हेल्दी नाश्तों के विकल्प आपको रेहड़ी पर नज़र आते हैं।

खुशियां हैं यहां

अगर आप जयपुर आएंगे तो आपको अहसास होगा कि जैसे यहां खुशियों का एक कल्चर सेलिब्रेट होता है। अगर बारिश की पहचान तीज है तो सर्दियों में यहां इंटरनेशनल फेस्टिवल जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल है। कहने को तो यह फेस्टिवल 2008 से ही शुरू हुआ है लेकिन अब ऐसा लगता है मानो यह शहर की संस्कृति में रच-बस गया है। वहीं हाल ही में राजस्थान पर्यटन विभाग की ओर से हुआ घूमर फेस्टिवल भी आकर्षण का केंद्र रहा। इसमें न केवल महिलाओं ने घूमर नृत्य किया बल्कि तलवारबाज़ी करके साबित किया कि राजस्थान की वीरांगनाओं की शक्ति भी बेमिसाल है। इस शहर में और इस शहर में आने वाले खुश होने के बहाने ढूंढ ही लेते हैं। आप भी इस सर्दियों आइए जयपुर और मजा लीजिए इस शहर की तासीर का।

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