राजस्थान की संस्कृति की बात ही अलग है। टूरिस्ट जब यहां के महल और हवेलियां देखता है तो कल्पना करता है कि राजा-महाराजा के जमाने में यहां की शान क्या रही होगी। वहीं यहां के पारंपरिक मेलों और उत्सवों का भी अपना ही एक अलग अनुभव है। यहां के तीज त्योहार जब पारंपरिक रंग में डूबते हैं तो उसकी छटा ही अलग होती है। तीज उत्सव भी ऐसा ही एक उत्सव है। जो कहने को तो किसी एक संप्रदाय विशेष का त्योहार है, लेकिन इसका आनंद जयपुर के साथ-साथ पूरे विश्व से आने वाले पर्यटक लेते हैं। हर साल होने वाला तीज उत्सव ग्लोबल मंच पर राजस्थान का एक हस्ताक्षर बन चुका है।
कब होगा इस बार तीज उत्सव
हर साल सावन मास में तीज उत्सव का आयोजन किया जाता है। यूं तो सावन के महीने का हिंदू धर्म में अपना एक महत्व है। इस मास में अक्सर हिंदू धर्म के अनुयायी व्रत रखते हैं। भगवान से आराधना करते हैं। लेकिन तीज को सेलिब्रेट जयपुर करता है। सबसे खास बात होती है तीज माता की शाही सवारी। यह सवारी त्रिपोलिया गेट से निकलकर तालकटोरे तक जाती है। इस शाही लवाजमे की आभा देखते ही बनती है। इसमें तीज माता के साथ घोड़े, हाथी और सजे हुए बैल भी शामिल होते हैं। इस दौरान बहुत सी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी होती हैं। यह परंपरा जयपुर में 298 साल पुरानी है। इस बार तीज उत्सव 15 और 16 अगस्त को होगा।
सिटी पैलेस में विराजमान हैं तीज माता
तीज माता जयपुर के सिटी पैलेस की जनानी ड्योढ़ी में विराजमान हैं। पूर्व राजघराने की महिलाएं इस तीज उत्सव के लिए उनका श्रृंगार करती हैं, उसके बाद विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने के बाद मां को शाही सवारी में बिठाकर नगर सैर कराई जाती है। मां की पालकी भी राजसी शानोशौकत को बयां करती है। यह पालकी, जिसमें तीज माता विराजित हैं, यह 400 किलो चांदी से बनी है। इसके ऊपर एक छतरी भी लगाई जाती है ताकि बारिश की बूंदें पालकी पर न पड़ें। 15 अगस्त को शाम 5 बजे से यह उत्सव शुरू होगा।
मरुधा कंवर और जनानी ड्योढ़ी की रौनक
आजादी से पहले की बात करें तो जयपुर महाराज मानसिंह द्वितीय की पहली पत्नी मरूधा कंवर के रावले यानी उनके महल में तीज की रौनक कुछ अलग ही होती थी। तीज माता को रत्न जड़ित आभूषण और सोने-चांदी के गोटे लगी पोशाक पहनाकर अलौकिक श्रृंगार किया जाता था। रामनिवास बाग, रामबाग और घाट की गुनी के राज निवास बाग से तीज माता के लिए सुगंधित केवड़े और गेंदे के फूल आते थे। ताकि जब सवारी निकलें तो फूलों की सुगंध हवा को महका दे।
घेवर और लहरिया भी
अगर आप जयपुर आने का प्लान कर रहे हैं तो यह मौसम उत्सव के साथ बारिश और सावन का आनंद लेने के लिए भी परफेक्ट है। अरावली पर्वतमाला, जिससे जयपुर घिरा है, इस वक्त उसने भी हरी चुनरी ओढ़ ली है। दिल्ली से अगर आप आ रहे हैं तो सड़क मार्ग से आएं। प्रकृति के खूबसूरत रंग आपको दिखेंगे। यह दृश्य आपकी आंखों को बहुत ठंडक देने वाले हैं। वहीं जयपुर के स्थानीय बाजारों में इस वक्त लहरिया की भारी वैरायटी देखने को मिलेगी। यहां सास अपनी बहू को सिंजारा देती है। जिसमें लहरिया की साड़ी और श्रृंगार का सामान होता है। यही कारण है कि अगर आप लहरिया को पसंद करते हैं तो सावन में इसे खरीदना समझदारी होगी। वहीं जयपुर की फेमस मिठाई घेवर भी सावन में बड़े चाव से खाए जाते हैं। आप भी आइए, स्वाद और परंपराओं का आनंद उठाइए।
राजस्थान टूरिज्म डिपार्टमेंट और सिटी पैलेस
राजस्थान टूरिज्म डिपार्टमेंट और सिटी पैलेस की ओर से तीज उत्सव का आयोजन किया जाता है। इस बार पौंड्रिक पार्क में भी तीज फेयर लगेगा। लेकिन यहां प्रवेश केवल महिलाओं के लिए ही है। इस दिन बगीचों में जाकर झूला झूलने की परंपरा भी है। पेड़ों पर झूले बंधते हैं। पहले नाव की रस्सियां पेड़ों पर बंधा करती थीं। आप भी अपने हाथों में मेहंदी सजाकर पधारिए जयपुर। यहां आकर झूले झूलिए। लहरिया पहनकर खुद को सजाइए। ताकि आपको पता चले कि लगातार डेवलप होते जयपुर ने बेशक बदलाव को स्वीकार किया है, लेकिन अपनी परंपराओं और संस्कृति को लेकर वो न केवल गौरवान्वित है, बल्कि उसे मजबूती से थामे हुए है।
इस शहर में इंटरनेशनल फेस्टिवल भी होते हैं और मेले भी लगते हैं। हां, सबसे बड़ी बात आप जयपुर से सीख सकते हैं कि उत्सव किसी एक धर्म तक सीमित नहीं है। उसे पूरा शहर सेलिब्रेट करता है। तो इस बार पधार रहे हैं ना आप जयपुर। हम जयपुर वाले पलकें बिछाए आपका इंतजार कर रहे हैं।
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