जीत-हार के परे राजस्थान के निकाय चुनाव के कुछ अजब-गजब किस्से

जीत-हार के परे राजस्थान के निकाय चुनाव के कुछ अजब-गजब किस्से

राजस्थान में हाल ही में शहरी निकाय के चुनाव संपन्न हुए। इसके परिणाम 14 सितंबर को घोषित किए गए हैं। इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने भारी जीत दर्ज की है। वहीं, दूसरे स्थान पर कांग्रेस ने कब्जा जमाया। चुनाव होते हैं तो कोई पार्टी जीतती है तो कोई हारती है। लेकिन हां, हर चुनाव में कुछ न कुछ ऐसा होता है, जो हमेशा याद रह जाता है। इस बार के चुनाव को ही देख लें। प्रत्याशियों ने अपनी जीत के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाया। किसी को जीत मिली तो किसी को हार। हां, लेकिन इस बार चर्चा में कुछ अजब-गजब किस्से भी रहे। तो देखते हैं उनकी झलकियां।

सिर्फ एक वोट मिला

राजस्थान का एक शहर है डीडवाना। इसके परबतसर के वार्ड 13 के बीजेपी प्रत्याशी कैलाश चंद्र इस समय चर्चा का विषय बने हुए हैं। इसकी वजह उनका काम-काज और पार्टी में उनकी पैठ नहीं है। वो तो इस चुनाव को हार चुके हैं। लेकिन वो हारे भी इस अंदाज में हैं कि उनका हारना भी उनके जीवन में कभी न भूलने वाला अनुभव बन चुका है।

दरअसल, उन्हें सिर्फ एक वोट मिला है। नाते-रिश्तेदारों को तो भूल ही जाइए। लेकिन सवाल है कि क्या उनके परिजनों ने भी उनको वोट नहीं दिया? खैर, इनके परिवार में 13 लोग हैं। इस बात पर परिवार की सफाई भी सामने आई है। उन्होंने कहा कि इस वार्ड में उनका परिवार वोटर नहीं था।

खैर, परिवार तो अपनी सफाई देकर छूट गया, लेकिन हैरानी की बात यह है कि उनके साथ बीजेपी प्रत्याशी के नामांकन में दो प्रस्तावक भी थे। लेकिन प्रस्तावकों ने भी उन्हें वोट नहीं दिया। अगर प्रस्तावक वोट दे देते तो वोटों की गिनती तीन तो हो जाती।

इस वार्ड में कांग्रेस की हिना खान ने भारी वोटों के साथ जीत हासिल की है। कैलाश चंद्र ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को बताया है कि वे वार्ड 12 के वोटर हैं। पार्टी की ओर से उन्हें वार्ड 13 का टिकट मिला था।

लेकिन आप रुकिए जरा, इस रिकॉर्ड को बनाने में कैलाश चंद्र का साथ दिया है कांग्रेस के मजीद मोहम्मद ने। नागौर जिले की रियांबड़ी नगर पालिका के वार्ड नंबर 15 में कांग्रेस प्रत्याशी मजीद को भी केवल 1 वोट के साथ संतोष करना पड़ा।

खैर, कैलाश चंद्र को तो इस बात का दुख नहीं होगा कि परिवार ने साथ नहीं दिया। उनका वार्ड अलग था। लेकिन मजीद साहब का दुख तो चुनाव हारने के बाद उनके बयान में ही नजर आता है। वे कहने लगे कि चुनाव प्रचार के दौरान उनके साथ लगभग 35 समर्थक घूमा करते थे, लेकिन उनके पड़ोसियों और समर्थकों ने कांग्रेस के बजाय राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के उम्मीदवार को वोट दे दिया, जिस वजह से उन्हें सिर्फ एक ही वोट मिल सका।

अब आप खुद सोचिए, इस आदमी के दिल पर क्या बीती होगी, जिन लोगों ने साथ रहने के बाद भी उन्हें समर्थन नहीं दिया।

अब नहीं कहेंगे कि 1 से क्या ही हो जाएगा

हम सब हमेशा कहते हैं, एक अकेले से क्या ही फर्क पड़ जाएगा। एक से क्या होता है। मेरे अकेले से क्या फर्क पड़ने वाला है। लेकिन बीकानेर के लूणकरणसर वार्ड 5 के गणेश नाथ ने 1 वोट की बढ़त के साथ जीत हासिल की है।

वे कांग्रेस से चुनाव लड़े और एक वोट के अंतर से जीते। बीजेपी से तोलाराम इस सीट के लिए लड़ रहे थे। शुरुआती रुझान कांग्रेस की तरफ था, लेकिन जब नतीजे सामने आए तो फैसला हैरान कर देने वाला था।

गणेश नाथ को 166 वोट मिले, जबकि तोलाराम को 165 वोटों के साथ संतोष करना पड़ा। बहरहाल, 1 नंबर के मायने क्या होते हैं, इसे गणेश नाथ से बेहतर कोई नहीं समझ सकता।

जीरो के साथ चर्चा में ओमप्रकाश

चलो, खैर, यहां तो बात एक वोट से जीतने और हारने की थी, लेकिन पश्चिम राजस्थान का औद्योगिक और व्यापारिक केंद्र बालोतरा चुनाव के बाद सोशल मीडिया और सत्ता के गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

असल में, यहां की सिणधरी नगरपालिका के वार्ड नंबर 3 के राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के उम्मीदवार ओम प्रकाश को शून्य वोट मिले हैं। जबकि इस वार्ड में NOTA को भी एक वोट मिला है। इस वार्ड में कांग्रेस के भंवरा राम को 133 वोट मिले हैं।

हालांकि, चुनावी नतीजों में किसी उम्मीदवार को कम और किसी को ज्यादा वोट मिलना एक आम बात होती है। लेकिन ओम प्रकाश को जब शून्य वोट मिले तो सच में यह नतीजा लोगों के लिए हैरान कर देने वाला था।

अब इस खबर को देखकर आपको लग रहा होगा कि कम से कम वो तो अपने लिए वोट डाल ही सकते थे। क्या उन्होंने तक स्वयं को वोट नहीं डाला? तो आपको बता दें कि वो उस वार्ड के वोटर नहीं थे। वरना मजीद मोहम्मद और कैलाश चंद्र की तरह उन्हें कम से कम एक वोट तो मिल ही जाता।

लेकिन खैर, जिंदगी में पॉजिटिव साइड पर देखना चाहिए। ओम प्रकाश इस जीरो की वजह से चर्चा का विषय बने हुए हैं।

92 वोटर वाला वार्ड

अगर हम आपसे यह सवाल पूछें कि क्या आपको लगता है कि अगर आपको बीस से तीस वोट मिलें तो कोई उम्मीदवार पार्षद बन सकता है? आप कहेंगे कि क्या मजाक है भई! ऐसा कैसे हो सकता है? बीस से तीस वोट मिलने से तो सिर्फ खाता खुलना ही शुरू होता है।

लेकिन नहीं, राजस्थान में 92 मतदाताओं वाला सबसे अनोखा वार्ड झुंझुनूं जिले की मंड्रेला नगरपालिका का वार्ड नंबर 13 है, जहां आपको जीतने के लिए महज बीस से तीस वोट चाहिए।

बहुत कम मतदाता होने की वजह से यह वार्ड हमेशा चर्चा में रहता है। यह सामान्य श्रेणी का वार्ड है।

खैर, अब चुनाव निपट चुके हैं। कोई जीता है तो कोई हारा है। लेकिन चुनाव के ये किस्से अपने आप में एक अनुभव बन चुके हैं।

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