ज़िंदगी में कई बार हमें कुछ ऐसी गलतफहमियां होती हैं, जिनका पता वक्त आने पर चलता है। ऐसी ही गलती मिलेनियम जेनरेशन की जेन जी को लेकर हुई थी। हमें लगता था कि मोबाइल और लैपटॉप को अपनी उंगलियों से स्क्रॉल करते इन बच्चों को हकीकत की ज़िंदगी का पता ही नहीं है। एसी कमरों में अपने कमरों में बैठे यह बच्चे एक ऑनलाइन आभासी दुनिया में रहते हैं। इन्हें आस-पास की दुनिया से कोई सरोकार नहीं है। लेकिन एजुकेशन मिनिस्टर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे ने यह साबित कर दिया कि आसमां को धरती पर लाने वाला चाहिए, झुकती है दुनिया झुकाने वाला चाहिए। जंतर-मंतर पर आपने जो अपनी शक्ति का मंत्र फूंका है, वो बेमिसाल है। आपने जो प्रोटेस्ट किया, वो अब इतिहास के सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा। आप न केवल हमारे लिए बल्कि आने वाली पीढ़ी के लिए भी रोल मॉडल होंगे। शाबाश ब्रो। आपकी पीढ़ी की कुछ खूबियां, जो हमने प्रोटेस्ट में देखीं, सोचा आपको और पूरी दुनिया को भी बता दी जाएं। सच है कि यह प्रोटेस्ट सबसे अलग रहा।
सटायर में माहिर हैं
आप भले ही जंतर-मंतर न आए हों, लेकिन रील्स में तो आपने देखा ही होगा कि बच्चे अपनी हाज़िरजवाबी से क्या कमाल कर रहे हैं। वो ऐसे नारे, स्लोगन और सॉन्ग्स लेकर आए हैं, जो मिनटों में वायरल हो रहे हैं। अगर आप इनसे बात करेंगे तो यह अपनी बातों में ही आपको उलझा देते हैं। इसका एक ताज़ा उदाहरण आपको बताते हैं। जब एक रिपोर्टर ने एक बच्चे से पूछा कि आपको डर नहीं लगता कि आप यहां आए हैं, तो उसने कहा, "नहीं-नहीं, मैं तो यहां सेफ हूं। मैं कह दूंगा कि मैं स्टूडेंट हूं ही नहीं। मैं तो रेपिस्ट हूं।"
यह जवाब वाकई सिस्टम को हिला देने वाला था, लेकिन एकाएक किसी को समझ में नहीं आ सकता। वहीं अगर इन बच्चों से इनका नाम पूछा जा रहा है, तो धर्म की राजनीति के बारे में पोल यहां भी खुलती नज़र आ रही है। कोई बता रहा है, "मेरा नाम मो. दीपक है", तो कोई "राहुल खान" है।
गांधी जी भी आ गए
जेन जी कितनी रचनात्मक है, यह बात आपको यहां देखने को मिली। यह प्रोटेस्ट अपने आप में बहुत रुचिकर हो गया है। यहां बच्चे कैरेक्टर्स भी लेकर आ रहे हैं। जैसे गांधी, भीमराव आंबेडकर। यह प्रोटेस्ट इस वक्त पूरी दुनिया की निगाहों में है। वहीं एक बच्चा तो कॉकरोच बनकर ही आ गया। यह सिस्टम को किस तरह से ग्रिल कर रहे हैं। यह वाकई कमाल है।
यह जेन जी है भाई, इसकी लाइफ बहुत एक्साइटिंग है। इतनी चुनौतियों के बीच में यह एक्साइटमेंट और प्रेजेंस ऑफ माइंड का बना रहना बहुत बड़ी बात है। दिल्ली में इस वक्त मौसम की चुनौतियां भी कम नहीं हैं। इन बच्चों ने बारिश, गर्मी और उमस सभी को सहा है। पुलिस की मार भी खाई है। वहीं लड़कियां भी बहुत मुस्तैदी के साथ प्रोटेस्ट में न केवल साथ निभाती नज़र आईं, बल्कि कई बार वो प्रोटेस्ट को लीड करती हुई दिखाई दीं।
डिजास्टर मैनेजमेंट के शहंशाह
एक चीज हमें सिखाई जाती है कि अगर कुछ प्रॉब्लम हो जाए तो इसे मैनेज करना भी अपने आप में एक कला है। इसे ही डिजास्टर मैनेजमेंट कहा जाता है। लेकिन प्रैक्टिकली डिजास्टर को मैनेज कैसे किया जाता है। यह हम इन बच्चों से सीख सकते हैं। बिहार में बच्चों पर उन्हें भगाने के लिए पानी डाला गया, तो उन्होंने रेन डांस कर लिया। वहीं जब पुलिस ने आगे बढ़ने से उन्हें रोकने के लिए रस्सी लगाई, तो पुलिस के साथ ही रस्साकशी का खेल भी खेल लिया। और तो और, जब पुलिस लाठी बरसाने के लिए आगे आई, तो राष्ट्रगान गाना शुरू कर दिया। इससे अच्छा डिजास्टर मैनेजमेंट और क्या हो सकता है? वहीं पुणे पुलिस के सामने बच्चों ने एक नारा भी लगाया, "यह अंदर की बात है, पुलिस हमारे साथ है।"
ऑनलाइन में भी कमाल
जंतर-मंतर और दूसरी जगहों पर ग्राउंड पर जेन जी की प्रेजेंस और धूम है। लेकिन इनकी फेवरेट जगह यानी सोशल मीडिया पर भी इनके चर्चे कुछ कम नहीं। फटाफट वीडियो और रील्स बनाने में यह जेनरेशन माहिर है। इन्हें पता है कि ऑनलाइन भी आप क्या कर सकते हैं। आजकल यह बच्चे इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के सोशल मीडिया अकाउंट पर खूब संदेश भेज रहे हैं। अब यह संदेश क्यों भेजे जा रहे हैं, यह बात बताने की ज़रूरत तो नहीं है। और अगर फिर भी बात समझ में नहीं आ रही, तो इतना ही कह सकते हैं, "मेलोडी खाओ, खुद जान जाओ।" वहीं एजुकेशन मिनिस्टर धर्मेंद्र प्रधान की बेटी का इंस्टाग्राम अकाउंट डिएक्टिव करने में इनका रोल छिपा हुआ नहीं है।
बाल की खाल निकालने में माहिर
यह बच्चे किस लेवल पर बाल की खाल निकालने में माहिर हैं, यह बात किसी से छिपी हुई नहीं है। जब भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस छोड़ी गई, तो इन डिब्बों का भी इंस्पेक्शन इन बच्चों ने कर लिया। एक डिब्बे की एक्सपायरी 2025 की थी। एक बच्चे ने इस पर रील बनाई और कहा कि यह तो कम से कम यह सरकार देख लेती। यह भी एक्सपायरी है।
खैर, हम इतना ही कह सकते हैं, इन बच्चों ने बहुत मजबूती के साथ खड़े रहकर वो कर दिया, जो कोई सोच भी नहीं सकता था। वे अपने अधिकारों के लिए लड़े, डटे रहे। इतिहास इन बच्चों और जंतर-मंतर को याद रखेगा। जेन जी, तुम सच में कमाल हो, ऑनलाइन भी और ऑफलाइन भी।
बच्चों, यह जीत तुम्हारी, यह दिन तुम्हारा। तुम लड़े भी और जीते भी। हम उम्मीद करते हैं कि एजुकेशन सिस्टम सुधरेगा। हां, क्रांति के मायने भी तुमने हमें सिखला दिए।
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