हम भारत में रहने वाले लोग बहुत सी विभिन्नताओं और विविधता के साथ रहते आए हैं। हमारे भारत की इस संस्कृति को और भी खूबसूरत बनाते हैं हमारे देश के त्योहार। सर्दी के इस मौसम में बच्चों और बड़ों के फ़ेवरेट सांता क्लॉज आते हैं। तो फसल जब कटती है तो पीली चुनरिया ओढ़कर बैसाखी आती है। सर्दी का मौसम बहुत से त्योहारों और खान-पान को साथ लाता है। तिल के लड्डू, गजक, पकौड़ी और पतंगों का ऐसा ही उत्सव है मकर संक्रांति का। वैसे तो मकर संक्रांति पूरे देश में ही मनाई जाती है। लेकिन जयपुर में इसका अपना एक अलग ही मज़ा है। लेकिन इस आर्टिकल में हम जयपुर की संक्रांति के बारे में चर्चा नहीं करेंगे। आपको पता ही होगा कि जयपुर का यह उत्सव किसी धर्म विशेष तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इस शहर की गंगा-जमुनी तहज़ीब की एक बानगी है।
वो वक्त नहीं है
समय के साथ बहुत कुछ बदल जाता है। हालांकि आज भी पतंग उड़ाने का क्रेज़ है, लेकिन वो पहले वाली बात आज नहीं है। लेकिन इस बात को याद रखें कि पतंगबाज़ी हमारा हुनर है। इस हुनर को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक देना हमारी ज़िम्मेदारी है। तो क्या हुआ कि वक्त नहीं है। वक्त निकालने से निकल ही जाएगा। लेकिन याद रखिए कि अगर पतंग की डोर आपके हाथ से निकल गई, तो एक तहज़ीब, एक संस्कृति आपके हाथों से निकल जाएगी।
पतंग बहुत कुछ सिखाती है
अगर आपने थोड़ी-बहुत भी कभी पतंग उड़ाई है तो आप इस बात को भली-भांति जानते ही होंगे कि पतंग उड़ाना अपने आप में किसी हुनर से कम नहीं है। सबसे पहले तो इसके उड़ने के लिए हवा का होना ज़रूरी होता है। हवा ज़्यादा भी नहीं होनी चाहिए और कम भी नहीं होनी चाहिए। वहीं जब पतंग हवा में जाती है, तो जब तक पेंच न लड़ें तो मज़ा ही नहीं आता। कभी ढील दीजिए, कभी खींच मारिए, कभी जीतिए, कभी हारिए। कुल मिलाकर बात यह है कि पतंगबाज़ी को एंजॉय करिए।
पड़ोसियों के साथ संबंध
खैर अब वो ज़माना तो नहीं रहा कि लोग हर समय पड़ोसियों के साथ बातचीत करें। लेकिन पतंगबाज़ी आपके पड़ोसियों के साथ आपके संबंधों में उजास भरने का एक मौका देती है। इस दिन अपना पूरा दिन छत पर बिताएं। जायकों की अदला-बदली अपने पड़ोसियों के साथ करें। अगर पड़ोसियों के साथ बहुत अच्छे संबंध हैं तो पहले से ही छत पर होने वाली पार्टी की प्लानिंग की जा सकती है। अगर ऐसा नहीं भी है तो भी कोई बात नहीं। वो अगर आपको पकौड़ी ऑफ़र करें तो आप उनकी तरफ़ तिल के लड्डू बढ़ा दें।
तो बस फिर तैयारी कर लीजिए, पतंग की डोर के साथ रिश्तों की डोर को भी संभालने की। लेकिन अपने मज़े में बेज़ुबान परिंदों का भी ध्यान रखें। चाइनीज़ मांझे का इस्तेमाल न करें। पतंगों का यह त्योहार आपको बहुत कुछ सिखाने आ रहा है। बस ख़ुद को 14 जनवरी को पतंग के रंग में रंग लें।
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