मक्के और बाजरे की खुशबू के साथ लौट आया है वो जमाना

मक्के और बाजरे की खुशबू के साथ लौट आया है वो जमाना

मक्के और बाजरे की खुशबू के साथ लौट आया है वो जमाना

जिंदगी में बदलाव से जरूरी कुछ भी नहीं होता। पुरानी चीजें बदलती जाती हैं, नई चीजें आती जाती हैं। नई चीजों को स्वीकार करना और आगे बढ़ना जिंदगी का दस्तूर है। जो वक्त के साथ बदलता है उसे दुनिया समझदार कहती है, और जो पुरानी बातों और पुरानी चीजों को लेकर बैठा रहता है वो इस भागती दौड़ती जिंदगी में पीछे हो जाता है। आउटडेटेड कहलाता है। लेकिन यह वक्त का पहिया है जनाब कुछ पीछे हुआ कभी कुछ पुराना एक नए अंदाज में फिर से लौट आता है। अब मक्के और बाजरे को ही देख लें। अपनी खुशबू और स्वाद के साथ यह भी इस जमाने में लौट आया है। अब इस जमाने में यह इतना रंग गया है कि लगता ही नहीं है कि यह कोई पुरानी चीज है। नए जमाने के हिसाब से बेशक थोड़े बहुत बदलाव है। लेकिन जायका तो वही है जो यादों की पगडंडी पर ले जाता है। इसे जब आप खाते हैं तो ना जाने कब में यह जायका आपकी अंगुली पकड़कर नानी और दादी के उस गांव में ले जाता है। जहां चूल्हे पर रोटियां सेंकती नानी खाने के साथ कोई जादू सा जैसे करती थी। कोहरे की उस ठंड में हम चूल्हे के साथ सिर्फ आग को नहीं सेंका करते थे बल्कि रिश्तों की गर्माहट भी उसी में चमकती थी। उस स्वाद में रिश्तों की चाश्नी घुलती थी।

यकीं नहीं है मिलेट्स को देख लें

नहीं यह सच है कि कुछ पुरानी चीजें लौट आती हैं। अपने एक अंदाज में। मिलेट्स को ही देख लें। आजकल इसे नए जमाने का सुपरफूड बताया जा रहा है। आज के नए जमाने के लोग इसके चीले, उपमें, रोटी, सूप और ना जाने क्या क्या बनाकर खा रहे हैं। इतना हेल्दी समझकर तो शायद पुराने लोगों ने भी इसे नहीं खाया था और शायद इतने एक्सपेरिमेंट भी नहीं किए थे।

अब सेलिब्रेटीज को ही देख लें। गेहूं की रोटी का रिप्लेसमेंट उन्होंने मिलेट्स के साथ कर दिया है। मक्का बाजरा की रोटियां खाना लेकिन हमारे बुजुर्गों के लिए कोई नई बात नहीं है। इसे पहले हमारे भारत में मोटा अनाज कहा जाता था और अब इसका नाम मिलेट्स है। लेकिन खैर चलो नए जमाने का यह नया अंदाज अपने आप में बहुत खूबसूरत है।

जहां चाह वहां राह

जब आपके मन में किसी की चाहत होती है तो आप उसे अचीव कर ही लेते हैं। यह सच है कि मोटे अनाज की रोटियों का स्वाद चूल्हे पर आता है। आज भी हमारे गांव देहातों में चूल्हे पर जब यह सौंधी रोटियां सेंकी जाती हैं और इन पर असली घी लगाकर लहसुन की चटनी के साथ खाया जाता है तो इनका स्वाद शब्दों से बयां करने के बाहर की चीज है। यह भी अपने आप में एक हकीकत है कि इन रोटियों को बनाना इतना आसान नहीं। लेकिन कभी आउटडेटेड हो चुकी यह रोटियां आज स्वाद और सेहत की वजह से मॉर्डन किचेन में भी इन हैं। आज के जमाने के लोग इन्हें बनाना बखूबी सीख गए हैं। चूल्हा ना सही तो क्या हुआ गैस पर भी इन्हें वे बना रहे हैं।

नई पीढ़ी जिम्मेदार है

इस नई पीढ़ी को देख लें। आप कुछ मानें या ना मानें लेकिन हम सभी को इस बात को समझना होगा कि सेहत के प्रति यह पीढ़ी काफी सतर्क और संवेदनशील है। इनकी चाहत केवल पतला दिखना नहीं सेहतमंद भी बने रहना है। इसी जागरूकता की वजह से मिलेट्स भी रसोई का हिस्सा बन चुके हैं। यह स्वाद में तो अच्छे होते ही हैं बल्कि पोषण के मामले में भी इनका कोई मुकाबला नहीं है। यह ना केवल वजन प्रबंधन में सहायक हैं बल्कि अन्य शारीरिक समस्याओं के लिए भी इनका सेवन करना अच्छा है।

तो आप भी कर लीजिए स्वागत

मिलेट्स को आप भी अपनी थाली में शामिल कर लीजिए। वैसे भी अब सर्दियां दरवाजे पर दस्तक दे रही हैं। मिलेट्स के जायकों का मजा तब और बढ़ जाता है जब हवा में कुछ खुन्की सी आ जाती है। मिलेट्स की रोटियों में आपको एक जुड़ाव सा महसूस होगा। इसके जायके का वो खालिस अंदाज अपने आप में बेजोड़ है। अगर हम इन रोटियों को गहराई से महसूस करेंगे तो जान पाएंगे कि सच है कि सादगी की कोई होड़ नहीं होती।

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