दुनिया में सारे लोगों को हम महिलाओं के पहनावे को लेकर बहुत परेशानी है। हम महिलाएं अगर कुछ फैशनेबल कपड़े पहन लें तो मुसीबत और अगर हम हिजाब पहन लें तो एक अलग परेशानी। हिजाब से जुड़े बहुत से सवाल और बहुत से जुड़े विवाद सामने आते रहते हैं। लेकिन हाल ही में बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जब एक महिला डॉक्टर का हिजाब खींचा तो यह मामला हिजाब के साथ-साथ किसी की निजता का उल्लंघन भी है। बेशक़ वो राज्य के नायक हैं, मुख्यमंत्री हैं। लेकिन यह ध्यान रखना चाहिए था कि सामने वाले का सम्मान भी करना होता है। उन्हें किसने यह अधिकार दिया था कि वे हिजाब खींचने की हिम्मत कर पाएं। जी हां, हिम्मत, क्योंकि किसी को भी यह अधिकार नहीं होता कि वो तय करेगा कि सामने वाला कैसे अपना जीवन जिएगा। यह घटना मीडिया में सुर्खियां बटोर रही है।
बॉलीवुड भी कर रहा है विरोध
हमेशा विवादों में रहने वाली और अपनी बेबाक बयानबाज़ी के लिए मशहूर राखी सावंत ने भी खुलकर हिजाब खींचने को लेकर अपना विरोध किया है। उन्होंने कहा है कि नीतीश जी, मैं आपकी बहुत इज़्ज़त करती हूं। उन्होंने कहा कि क़ुरआन में भी पर्दे का ज़िक्र है और एक मुस्लिम महिला के पर्दे या अबाया को कोई हाथ नहीं लगा सकता। वहीं सना खान ने भी इस प्रकरण पर खुलकर विरोध किया है और कहा है कि नीतीश को इस संदर्भ में माफ़ी मांगनी चाहिए। उन्होंने अपनी इंस्टा स्टोरी पर कहा कि उन्होंने उस महिला के चेहरे से नक़ाब खींचा और पीछे खड़े लोग इस बात पर हंस रहे थे। मेरा दिल चाहा कि मैं उन्हें खींचकर थप्पड़ मार दूं।
सर आप सम्मान दे रहे थे
कितनी अजीब बात है ना कि हमारे इंडिया में सब कुछ बहुत अलग तरह से होता है। यह एक इवेंट था जो पटना में आयोजित हो रहा था। एक तरह का सम्मान समारोह था। लेकिन इस सम्मान समारोह में ही वो अपमान हुआ जो कि इंसान सोच भी नहीं सकता। न जाने उनके लिए चेहरा देखने की क्या उत्सुकता थी कि वो हिजाब खींच बैठे। अगर इतने बड़े सार्वजनिक मंचों पर महिलाओं के साथ यह सुलूक हो रहा है तो सोचिए कि भारत की हम महिलाएं कितनी सुरक्षित हैं?
हिजाब पर आप असहमत या सहमत हो सकते हैं लेकिन
इस्लाम धर्म को मानने वाली महिलाएं हिजाब करती हैं। इस धर्म में महिलाओं को हिजाब करने पर ज़ोर दिया गया है। लेकिन हिजाब करने का अर्थ यह कतई नहीं है कि वो कुछ कर नहीं सकतीं या वे केवल घर तक ही सीमित रहेंगी। बहुत सी मुस्लिम महिलाओं ने हिजाब पहनकर बहुत कुछ हासिल किया है। लेकिन लेकिन लेकिन हम भारत में रहते हैं। ऐसे में हो सकता है कि किसी को हिजाब करना पसंद हो या न हो। जावेद अख़्तर की एक्स पर लिखी पोस्ट से यह बात हम और भी स्पष्ट तौर पर समझ सकते हैं कि आप पर्दे का विरोध करते हैं या नहीं करते हैं, लेकिन किसी का हिजाब खींचना ग़लत है।
“Every one who knows me even in the most cursory manner knows how much I am against the traditional concept of Parda but it doesn’t mean that by any stretch of imagination I can accept what Mr Nitish Kumar has done to a Muslim lady doctor. I condemn it in very strong words. Mr Nitish Kumar owes an unconditional apology to the lady.”
रहने दीजिए ना वो जैसे रहना चाहती है
पर्दे को लेकर बहुत बार विवाद होते हैं। लेकिन इस बात को समझने की कोशिश क्यों नहीं की जाती कि पर्दा करना या नहीं करना उस इंसान का एक निजी मामला है। हम राजतंत्र में नहीं, लोकतंत्र में रहते हैं। जहां अपनी मर्जी से जीने का अधिकार हमें भारत का संविधान देता है। लेकिन फिर क्यों लोगों के मत बीच में आ जाते हैं?
आगे आने वाले समय में देखना होगा कि नीतीश जी माफ़ी मांगते हैं या नहीं। बस लोग पर्दा करने को लेकर थोड़ा खुलकर समझ पाएं तो बहुत सी समस्याएं जन्म ही नहीं लेंगी। हमें याद रखना चाहिए कि हम भारत के लोग हैं और विविधता हमारी पहचान है। अगर हम एक जैसे ही हो जाएंगे तो पहचान खो देंगे। आप सभी लोगों से एक विनती है… रहने दीजिए एक महिला को वैसे ही जैसे वो रहना चाहती है। एक आज़ाद भारत में क्या आधी दुनिया को यह आज़ादी मिल सकती है, सर?
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