देहरादून.... दूर पहाड़ों पर बसा एक शहर, जो अपने कल्चर, कॉफी, पेस्ट्री और एक तहजीब का नाम है। जो लोग वेबसीरीज देखते हैं, वे लोग ‘मुसाफिर कैफे’ वेबसीरीज जान ही चुके हैं कि जिंदगी की भागदौड़ में जब आप भागते-भागते थक जाओ तो चैन की सांस लेने का मौका देता है शहर देहरादून...। वे लोग जो किताबें पढ़ते हैं, वो इस शहर को एक और बहुत जरूरी एहसास के साथ जानते हैं। वो है इस शहर में रस्किन बॉन्ड का रहना। हालांकि पहले वे देहरादून के पास लैंडोर में 1963 से रह रहे थे। लेकिन 92 साल की उम्र में वे हेल्थ इश्यूज की वजह से देहरादून में रह रहे हैं। इस शहर से उनकी दोस्ती नई नहीं है। वे बचपन में अपनी नानी के साथ यहीं रहा करते थे।
तो कौन हैं रस्किन बॉन्ड
हिमालय की प्रकृति, पहाड़ और आम लोगों को पसंद करने वाले रस्किन बॉन्ड लिटरेचर की दुनिया का एक हस्ताक्षर हैं। उन्होंने 17 साल की उम्र में 'द रूम ऑन द रूफ' लिखी थी। इसके अलावा वे 500 से अधिक कहानियां और उपन्यास लिख चुके हैं। अपने लिटरेरी वर्क के लिए उन्हें पद्मश्री, पद्मभूषण और साहित्य पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है। वे ब्रिटिश मूल के एंग्लो-इंडियन राइटर हैं, जिनका जन्म 19 मई 1934 को हिमाचल प्रदेश के कसौली में हुआ था। बच्चों और बाल साहित्य में उनकी रुचि है। वे बच्चों के फेवरेट हैं और बच्चे उनके।
कोविड से पहले बुक स्टोर और ऑटोग्राफ
अक्सर आपने लिटरेचर फेस्टिवल्स में ऑथर को बुक पर ऑटोग्राफ देते हुए देखा होगा। लेकिन रस्किन बॉन्ड सबसे अलग हैं। वे बच्चे जो उनसे मिलना चाहते थे और उनका ऑटोग्राफ लेना चाहते थे, उनके लिए कैम्ब्रिज बुक डिपो बेस्ट जगह थी। यहां रस्किन बॉन्ड कोविड-19 महामारी से पहले तक हर शनिवार को दोपहर 3:30 से शाम 5:30 बजे के मसूरी के मॉल रोड पर स्थित इस ऐतिहासिक बुकस्टोर पर आते थे। यहां देश भर से आए बच्चे और उनके माता-पिता उनसे मिलने के लिए लंबी कतारों में खड़े होते थे। बॉन्ड बड़े ही प्यार से बच्चों से बातें करते, हंसी-मजाक करते और उनकी किताबों पर अपने ऑटोग्राफ देते थे। यह बहुत खूबसूरत मोमेंट होता था बच्चों के लिए।
रस्किन बॉन्ड एक प्राइवेट पर्सन हैं। लेकिन बच्चों के लिए वे हर बात को नजरअंदाज कर देते हैं। बहुत बार ऐसा भी होता था कि कुछ बच्चे उनसे मिलने सीधे उनके आवास आईवी कॉटेज के बाहर चले जाते थे। लेकिन अगर संभव होता और उनकी हेल्थ ठीक रहती तो वो अपने नन्हे फैंस को निराश नहीं करते थे।
लेकिन फिलहाल जो किया, वो कमाल
रस्किन बॉन्ड 90 साल के ऊपर के हो चुके हैं। हाल ही में उन्होंने अपनी एक स्पाइन सर्जरी भी कराई है। लेकिन जब एक नन्ही राइटर उनसे लखनऊ से मिलने पहुंची, न केवल वो उससे मिले बल्कि वो कर दिया जो अपने आप में एक मिसाल है। अद्रिका उमराव अपनी एक बुक लेकर उनके पास गई थी। उन्होंने उसकी किताब देखी और अपने हाथ से उसके लिए कुछ शब्द लिखे।
बच्ची के लिए यह मुलाकात महज किसी प्रसिद्ध लेखक से मिलने का अवसर नहीं थी, बल्कि उस साहित्यकार से मिलने का क्षण था, जिसकी कहानियों ने भारत की कई पीढ़ियों के बचपन को आकार दिया है।
मुलाकात के बाद रस्किन बॉन्ड ने बच्ची की किताब पर अपने हाथ से लिखा—
“Dear Adrika,
Congratulations on your book.
Keep writing!
Ruskin Bond
6/9/26”
यानी 6 सितंबर 2026 को लिखे इस छोटे से संदेश में बॉन्ड ने बच्ची को उसकी किताब के लिए बधाई दी और सिर्फ दो शब्दों में उसके आगे के लेखन की दिशा भी बता दी—“Keep writing!”
यह छोटा-सा संदेश उस बच्ची के लिए शायद किसी बड़े साहित्यिक पुरस्कार से कम नहीं है। जिस लेखक ने सात दशक से ज्यादा समय तक बच्चों और बड़ों के लिए लिखा हो, उसका किसी उभरते लेखक से “लिखते रहो” कहना अपने आप में एक खूबसूरत साहित्यिक आशीर्वाद है।
वो सच में कमाल हैं
रस्किन बॉन्ड ने बता दिया कि भाषा की जो सहजता उनकी महानतम कृतियों में नजर आती है, वो उस सहजता को जीते हैं। आप खुद सोचकर देखिए कि साहित्य के आसमान में वो कितने ऊपर हैं। और एक बच्ची को लिखते रहने का आशीर्वाद कितनी सहज भाषा में दे गए। लोग कहते हैं कि रस्किन बॉन्ड की सबसे बड़ी विशेषता उनकी भाषा की सादगी है। वे कठिन बातों को भी बेहद सहज ढंग से लिखते हैं। पेड़, बारिश, पहाड़, जानवर, दोस्ती, अकेलापन, बचपन और छोटे शहरों के मामूली से दिखने वाले लोग उनके साहित्य में असाधारण महत्व हासिल कर लेते हैं। लेकिन नहीं, इतनी शोहरत के बावजूद इतनी सहजता अपने अंदर शामिल करना उनकी सबसे बड़ी खूबी है। वाकई, उनकी लोकप्रियता का असली पैमाना पुरस्कार नहीं, वे लाखों पाठक हैं जो उनकी किताबों में अपने बचपन, अपने पहाड़, अपनी बारिश, अपने पेड़ और अपने आसपास के साधारण लोगों को पहचानते हैं।
अब उनकी पोती लिखती है कहानियां
उम्र का असर अब रस्किन बॉन्ड पर नजर आने लगा है। उनकी शारीरिक सक्रियता भी सीमित हुई है। उनकी थोड़ी नजर भी कम आने लगी है। इसलिए अब वे अपनी कहानियां हाथ से लिखने के बजाय अपनी पोती को बोलकर लिखवाते हैं। लेकिन वो क्रिएटिविटी थमी नहीं है। मई 2026 में उनके 92वें जन्मदिन के अवसर पर उनकी नई पुस्तक ‘All-Time Favourite Friendship Stories’ भी सामने आई।
आपको भी मौका मिले, आप भी पढ़ें और अपने बच्चों को भी पढ़वाएं। उनकी लेखनी से ही आप समझ पाएंगे कि वाकई रस्किन बॉन्ड होना क्या होता है।
इस तरह के और लेख पढ़ने के लिए हमारी केटेगरी "एडिटर्स चॉइस" पर क्लिक करें।



