यह बड़े स्कूल के बड़े सपने हैं जनाब

यह बड़े स्कूल के बड़े सपने हैं जनाब

जयपुर में अगर हम पिछले दिनों की बात कर रहे थे तो वो एक छोटी सी बच्ची अमायरा अपने मासूम सपनों के साथ शायद किसी सपनों की दुनिया में ही चली गई। उसके रोते हुए मां-बाप की तस्वीरें या उनके बयान जब आते हैं तो एक पेरेंट होने के नाते दिल में बहुत से सवाल आते हैं। उन्होंने अपनी बेटी के लिए शायद बहुत से सपने देखे होंगे। तभी तो उन्होंने अपनी बेटी का एडमिशन शहर के प्रतिष्ठित स्कूल नीरजा मोदी में करवाया। जयपुर का यह वो स्कूल है जहां एडमिशन तो खैर हर किसी के बस की बात ही नहीं है। लेकिन हर कोई जब इस स्कूल के सामने से गुजरता है तो इसको देखता हुआ गुजरता है। यहां पढ़ने वाले बच्चों को इंटरनेशनल एक्सपोजर मिलता है। इसके अलावा अगर पेरेंट होने के नाते अगर आप अपने बच्चे को नीरजा मोदी में पढ़ा रहे हैं तो एक मिडिल क्लास पेरेंट के लिए यह एक गौरव का क्षण है।

वो सपने लेकर आते हैं

नीरजा मोदी और ऐसे ही स्कूलों में अक्सर वो बच्चे एडमिशन लेते हैं जो कि समाज में एलीट क्लास से जुड़े होते हैं। लेकिन कुछ बच्चे ऐसे होते हैं जिनके मां-बाप के लिए इस तरह के स्कूल में एडमिशन एक मिशन होता है। उनके लिए आसान नहीं होता—मुश्किल होता है इस तरह के स्कूलों की फीसों का भरना। लेकिन फिर भी वो मेहनत करते हैं, बहुत जुस्तुजू से अपने बच्चों को भेज पाते हैं। अगर हम अमायरा के पेरेंट्स को देखें तो वह भी दिखने में ऐसे ही लगते हैं। मेहनतकश मिडिल क्लास लोग जब अपनी जिंदगी में बस अपने बच्चों को बेहतर बनाने के लिए मेहनत कर रहे हैं।

वो काश रह गया

अमायरा के केस की बात करें तो यह एक 9 साल की बच्ची का केस है। जिसने स्कूल में ही चार मंज़िल से कूदकर अपनी जान दे दी। 1 नवंबर को यह घटना हुई थी और उसके बाद से ही उसके मां-बाप एक बेचैनी में अपना वक्त गुज़ार रहे हैं। वो कैंडल मार्च कर रहे हैं। उसकी मां कहती है कि मेरी बेटी की मेंटल स्टेबिलिटी पर कोई बात नहीं होनी चाहिए। वो एक बहुत खुश बच्ची थी। वो बहुत सपने देखती थी। वो कभी साइंटिस्ट बनना चाहती थी तो कभी वो सिंगर बनना चाहती थी। लेकिन अब वो नहीं है। अब सभी कुछ ‘काश’ में बदल चुका है।

बुलिंग क्यों होती है

सीबीएसई की जांच रिपोर्ट भी आ चुकी है। सीसीटीवी कैमरे के फुटेज में स्पष्ट दिख रहा है कि वो बच्ची बुलिंग का शिकार हो रही थी। यह बुलिंग उस दिन सिर्फ नहीं हुई थी वो पिछले डेढ़ साल से बुलिंग का शिकार हो रही थी। बुलिंग… एक अंग्रेज़ी का शब्द। शायद आपको यह शब्द बहुत हल्का लगे। लेकिन जिसकी बुलिंग होती है ना उससे पूछिए इस शब्द के मायने क्या हैं। यह वो शब्द है जो बच्चे के आत्मविश्वास को तोड़कर उसे बिल्कुल अकेला और हार जाने का अहसास देता है। बहुत समय से अगर आप बुलिंग का शिकार हो रहे हो तो साइकोलॉजी के हिसाब से आप चाहे कितने भी लोगों के बीच मौजूद रहो आपको लगेगा कि आप इस दुनिया में जैसे बिल्कुल अकेले हो। वो लोग जो आपकी बुलिंग करते हैं वो आपके माइंड पर हावी हो जाते हैं। यह समस्या स्कूली बच्चों के साथ बहुत ज्यादा हो रही है। छोटी सी मासूम अमायरा भी ऐसी ही बुलिंग का शिकार हो गई।

बस एक मिनिट

सोशल मीडिया पर अमायरा के बारे में बहुत कुछ कहा और सुना जा रहा है। लेकिन आप कुछ भी कमेंट करने से पहले एक बार अच्छे से सोचिएगा। हर मां-बाप का सपना होता है कि उनके बच्चे एक अच्छी जिंदगी जिएं। अगर उनको पता होता कि उनकी बेटी के साथ यह हो जाएगा तो शायद वो इस स्कूल में एडमिशन ही ना कराते। खैर, मामले की जांच चल रही है। हम उम्मीद करते हैं कि अमायरा को न्याय मिले। साथ ही यह भी उम्मीद करते हैं कि वो बच्चे जो बुलिंग का शिकार हो रहे हैं उनके पेरेंट्स और उनके टीचर इस स्थिति को समझकर उनकी जिंदगी को बेहतर बना पाएं।

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