अगर अभी हम अपने इंटरनेट की फीड की बात करेंगे तो हाई-प्रोफाइल मर्डर केतन अग्रवाल की खबरों से भरी हुई है। केतन को उन्हीं की मंगेतर सिया गोयल ने खाई में धक्का देकर मौत की नींद सुला दिया। हम यहां आपसे चर्चा नहीं कर रहे कि यह सब क्यों और कैसे हुआ? हम सभी लोगों को तरह-तरह की रील और न्यूज़ के माध्यम से इस पूरे घटनाक्रम का पता चल चुका है। मुख्य बात यह है कि सिया केतन से शादी नहीं करना चाहती थी। उसे वो पसंद नहीं था। बल्कि वो अपने बॉयफ्रेंड चेतन चौधरी को पसंद करती थी। फिलहाल पुणे की रहने वाली सिया और चेतन दोनों ही पुलिस की पकड़ में हैं।
ये था क्या
ऐसी बात नहीं है कि पहले हत्याएं नहीं होती थीं। लेकिन हां, सोशल मीडिया के इस दौर में कुछ चीजें सनसनी बन जाती हैं। हम और आप कुछ दिन इन घटनाओं पर चर्चा करते हैं, फिर अपनी जिंदगी में व्यस्त और मस्त हो जाते हैं। आप कोई भी घटना उठाकर देख लें, चर्चाओं और रील बनने के दौर के बाद खामोशी छा जाती है। केस अदालत में चलता रहता है। लेकिन जिसके किसी अपने की हत्या होती है, उसके लिए यह बात जिंदगी भर का जख्म बन जाती है। केतन के मां-बाप कह रहे हैं कि हमारी तो पूरी दुनिया ही उजड़ गई। वो लड़की मना कर देती।
तो क्यों नहीं किया मना
केतन और सिया दोनों के ही मां-बाप के बयान सामने आ रहे हैं। सिया के मां-बाप तो यह तक कह रहे हैं कि अगर हमारी बेटी दोषी है तो उसे भी उसी तरह किले से धक्का दे दो। उनके पिता को तो इस वजह से हार्ट अटैक आ चुका है और वो अस्पताल में भर्ती हैं। वहीं केतन के मां-बाप और उसके दादाजी का दुख तो शब्दों में बयां भी नहीं किया जा सकता। यह बात समझ नहीं आ रही कि वो लड़की, जिसने अपने बॉयफ्रेंड के साथ मिलकर किसी की हत्या कर दी, उसके अंदर अपने मां-बाप से यह कहने का साहस नहीं था क्या कि वो अमुक व्यक्ति से शादी नहीं करना चाहती।
अपनी अक्ल का इस्तेमाल करें
बहुत लोग इंटरनेट पर यह बात कर रहे हैं कि पितृसत्तात्मक परिवार होने की वजह से वो शादी के लिए मना नहीं कर पाई। उसके घरवालों के बयान के अनुसार उन्हें उसके प्रेमी के बारे में पता तक नहीं था। लेकिन हत्या करने की हिम्मत जब सिया कर रही थी तो उससे पहले अपने पेरेंट्स के सामने बोलने की हिम्मत उसे ज़रूर करनी चाहिए थी। ज्यादा से ज्यादा क्या होता? उसके मां-बाप उसे डांटते, मारते, फटकारते। शायद उसे घर से निकाल देते। तब भी आज जिस स्थिति में वो है, उससे तो बेहतर ही होती। अगर हम सिया के पहलू से देखें तो अगर वो जमानत पर एक-दो साल में छूट भी जाती है, तो यह केस उसका पीछा नहीं छोड़ेगा।
जिंदगी आपकी है
यह बात सच है कि आज भी हिंदुस्तान में हमारे मां-बाप हमारी जिंदगी के बारे में निर्णय लेते हैं। हम सभी जानते हैं कि हर जमाना पिछले जमाने से अलग है। हमारी सोच और जिंदगी को जीने का नजरिया अलग हो सकता है। लेकिन चाहे लड़का हो या लड़की, उसको इस बात को समझना होगा कि शादी करना कोई मजाक नहीं होता। इसके इतर जिंदगी बहुत अनमोल चीज है, चाहे वो आपकी हो या सामने वाले की। अगर आप किसी और के साथ अपनी जिंदगी जीना चाहते हैं तो एक मासूम जिंदगी को बलि न चढ़ाएं। आप उस इंसान, उस रिश्ते को त्यागें। मना करने की हिम्मत रखें। अपने मां-बाप को समझाएं। आप स्वार्थी बनकर एक बार सोचिए तो सही कि किसी की जिंदगी को खत्म करके आप भी चैन से नहीं रह सकते। आप कोई प्रोफेशनल हत्यारे या डकैत नहीं हैं। पुलिस आपको छोड़ेगी नहीं, पूछताछ में आप पकड़ लिए जाएंगे।
यह स्त्रीवादिता नहीं है
बहुत लोगों ने इस समय स्त्रीवादिता को कटघरे में लाकर खड़ा कर दिया। लेकिन सिया ने जो किया, उसे स्त्रीवादिता नहीं कहा जा सकता। एक स्त्रीवादी स्त्री बहुत साहसी होती है। वो निडर, निर्भीक और सत्यवादी होती है। संघर्ष की परिभाषा वो जानती है। उसे डर नहीं लगता। वो समाज का सामना करने की भी हिम्मत रखती है। काश, सत्य को कहने का साहस सिया भी दिखा पाती। उसने जो किया, वो गलत नहीं, बहुत गलत किया। लेकिन झूठ के पैर नहीं होते। सिया भी पकड़ी गई। इंस्टाग्राम की सैड स्टोरीज़ भी उसे कानून की चंगुल से बचा नहीं पाईं।
इस तरह के और लेख पढ़ने के लिए हमारी केटेगरी "पेरेंटिंग" पर क्लिक करें।



