फीफा वर्ल्ड कप अब करो या मरो वाली सिचुएशन पर पहुंच चुका है

फीफा वर्ल्ड कप अब करो या मरो वाली सिचुएशन पर पहुंच चुका है

फीफा वर्ल्ड कप अब करो या मरो वाली सिचुएशन पर पहुंच चुका है

फीफा वर्ल्ड कप 2026 अब अपने दूसरे चरण में पहुंच गया है, जहां हर मैच करो या मरो वाली स्टाइल का है। जीतने वाली टीम टॉप 16 में जगह बनाएगी और हारने वाली बहाने। बहाने भी कुछ ऐसे ही होंगे- ऐसा हो गया था, वैसा हो गया था। मामूली-सी चूक थी। खैर, जीतने वाले के पास जीत का एक ही लॉजिक होता है। वहीं हारने वाले के पास हारने के 100 बहाने तैयार होते हैं। लेकिन फुटबॉल फैंस के लिए अच्छी खबर है कि अब दूसरे राउंड के 3 मैच हो चुके हैं। टॉप 16 में अब 3 टीमें ब्राज़ील, मोरक्को और पैराग्वे अपनी जगह बना चुकी हैं। दुनिया भर में इनके फैंस अपनी टीमों के लिए बहुत एक्साइटेड नजर आ रहे हैं।

और गेम पलट दिया ब्राज़ील ने

ब्राज़ील ने जापान को 2-1 से हराकर टॉप 16 में जगह बनाई है। यह जीत इतनी आसान नहीं थी। ऐसा इसलिए क्योंकि 29वें मिनट में जब जापान की तरफ से सानो ने पहला गोल दागा, तब ब्राज़ील की तरफ से हो रहे लगातार हमलों के बावजूद फर्स्ट हाफ तक जापान आगे रहा। ब्राज़ील की तरफ से इक्वलाइज़र आया 56वें मिनट में कासेमिरो की तरफ से। ऐसे में अब स्कोर हो गया 1-1। चूंकि फुटबॉल का मैच 90 मिनट का होता है, तो स्कोर तय समय तक 1-1 ही रहा। लगने लगा कि आज जापान ब्राज़ील को बाहर कर देगा, लेकिन कहते हैं ना कि खेल में कब क्या हो जाए, किसी को नहीं पता। अभी खेल बाकी था इंजरी टाइम का।

और फिर आया असली रोमांच

फुटबॉल में इंजरी टाइम, जिसे स्टॉपेज टाइम और एडेड टाइम भी कहा जाता है, वह एक्स्ट्रा टाइम होता है जो रेफरी द्वारा दिया जाता है। इसकी सबसे बड़ी वजह मैच के दौरान खराब हुए समय की भरपाई करना है। चूंकि फुटबॉल एक अग्रेसिव गेम है, जिसमें फाउल होना, चोट लगना, गोल के बाद का जश्न और खिलाड़ियों के रिप्लेसमेंट जैसी परिस्थितियां होती हैं, जिनमें काफी समय मैच रुका रहता है। मैच रेफरी ही इसका डिसीजन मेकर होता है।

इस मैच में 11 मिनट रेफरी की तरफ से दिए गए और फिर 90+6 मिनट में गेब्रियल मार्टिनेली ने ब्राज़ील को 2-1 से लीड में ला दिया। यह लीड मैच खत्म होने तक बनी रही। अंततः ब्राज़ील टॉप 16 में जगह बनाने में कामयाब रही। अगर हम गेब्रियल मार्टिनेली को मैच का हीरो कहेंगे तो गलत नहीं होगा। गेब्रियल लेफ्ट विंगर या फॉरवर्ड के रूप में खेलते हैं। यह खिलाड़ी अपनी तेज गति, ड्रिब्लिंग कौशल और अटैकिंग खेल के लिए जाने जाते हैं।

गेम के कुछ मोमेंट जो बने गेम चेंजर

वैसे जब हम खाली रिजल्ट्स देखते हैं तो लगता है कि नॉर्मल मैच था, फंसा हुआ चल रहा था। जबकि अगर आप मैच के स्टैट्स देखेंगे तो पता चलेगा कि ब्राज़ील पूरी तरह से डोमिनेट कर रही थी। ब्राज़ील की तरफ से 20 शॉट लिए गए और उनमें से 7 टारगेट पर थे। जबकि जापान की तरफ से पूरे मैच के दौरान सिर्फ 5 शॉट मारे गए, जिनमें 2 टारगेट पर थे। ब्राज़ील की टीम ने इस गेम में बता दिया कि एक टीम के तौर पर वो कितने बेहतरीन हैं। इस टीम के खिलाड़ियों ने अपने बेहतरीन पासिंग स्किल का प्रदर्शन किया। पूरे मैच में 679 पास किए, जबकि जापान की तरफ से यह सिर्फ 300 थे। मैच में 5 येलो कार्ड दिए गए, जिनमें 2 ब्राज़ील के खिलाड़ियों को और 3 जापान के खिलाड़ियों को मिले। ब्राज़ील ने 6 कॉर्नर हासिल किए, जबकि जापान सिर्फ 2 कॉर्नर हासिल करने में कामयाब रही।

हमें क्या हुआ हासिल

फिलहाल ब्राज़ील के लिए यह सेलिब्रेशन का समय है। लेकिन अगर हम इस गेम की मोरल ऑफ द स्टोरी की बात करें तो इस मैच ने साबित कर दिया कि हार्ड वर्क कभी बेकार नहीं जाता। आखिर तक आते-आते सब कुछ सही हो ही जाता है। यह हिंदी सिनेमा में भी होता है और यकीन करिए कि अपनी जिंदगी में भी होगा। बस मेहनत करते रहिए और लगे रहिए। आप फुटबॉल लवर हैं या नहीं हैं, लेकिन हां, अगर आप अपनी जिंदगी में कुछ हासिल करना चाहते हैं तो जापान और ब्राज़ील का यह मैच आपको जरूर देखना चाहिए। जहां आपको पता चलेगा कि मेहनत करके जो हासिल होता है उसका सुकून कैसा होता है। आप यह भी समझ पाएंगे कि हारी बाजी जीतने वाले को बाजीगर यूं ही नहीं कहा जाता।

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