बहुत सारी यादों और वादों के साथ फीफा वर्ल्ड कप अब खत्म हो गया। इस बार फीफा का सिकंदर स्पेन रहा। स्पेन ने जिस तरह पिछली बार की विजेता टीम अर्जेंटीना के खिलाफ खेला, वह वाकई कमाल था। इसी प्रदर्शन के दम पर उसने 16 साल बाद इस ट्रॉफी को अपने नाम किया। अब अगला फीफा वर्ल्ड कप चार साल बाद देखने को मिलेगा। लेकिन हर वर्ल्ड कप अपने साथ कुछ अच्छी और कुछ बुरी यादें छोड़ जाता है। इस बार भी उन्हीं यादों को एक साथ आप तक पहुंचाने की हमने कोशिश की है। यह वर्ल्ड कप इसलिए भी खास रहा क्योंकि मेसी और रोनाल्डो जैसे दिग्गज स्ट्राइकरों का यह आखिरी वर्ल्ड कप था। ऐसे में उन्हें खेलते हुए देखना फुटबॉल प्रेमियों के लिए यादगार अनुभव रहा।
गोलकीपर उनाई सिमोन
फुटबॉल में अक्सर स्ट्राइकरों की चर्चा होती है। एम्बापे, मेसी और रोनाल्डो जैसे दिग्गजों ने अपनी पहचान स्ट्राइकर के रूप में बनाई, लेकिन स्पेन के उनाई सिमोन ने अपनी शानदार गोलकीपिंग से दुनिया का ध्यान खींचा। उन्होंने इस वर्ल्ड कप में 650 मिनट का क्लीन शीट रिकॉर्ड बनाया। उनकी गोलकीपिंग इतनी शानदार रही कि बड़ी-बड़ी टीमें गोल करने में नाकाम रहीं। पूरे टूर्नामेंट में केवल बेल्जियम ही स्पेन के खिलाफ एक गोल कर पाया। उनाई सिमोन स्पेन की सबसे मजबूत दीवार बनकर उभरे।
सेलिब्रेशन का वो नाव वाला अंदाज़
जो भी टीम जीतती है, वह मैदान पर अपने अंदाज़ में जश्न मनाती है। लेकिन इस बार नार्वे की टीम का नाव चलाने की मुद्रा में किया गया सेलिब्रेशन सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ। इसे 'वाइकिंग रो' कहा जाता है। जब भी नार्वे की टीम जीतती, खिलाड़ी मैदान पर एक साथ बैठकर दोनों हाथों से काल्पनिक नाव चलाने (रोइंग) का अभिनय करते। उनके साथ स्टेडियम में मौजूद हजारों प्रशंसक भी हाथ चलाते और जोरदार आवाज़ लगाते। जश्न का यह अंदाज़ वाकई अनोखा और यादगार रहा।
बेल्जियम और मिस्त्र की टीम
जुलाई 2026 की फीफा रैंकिंग के अनुसार बेल्जियम दुनिया की आठवें नंबर की टीम है। इस बार मैदान पर उसके शानदार प्रदर्शन के साथ-साथ अमेरिका के खिलाफ विवाद भी खूब चर्चा में रहा। दरअसल, फीफा ने अमेरिकी खिलाड़ी बालोगुन का प्रतिबंध हटाकर उन्हें राउंड ऑफ 16 में खेलने की अनुमति दे दी थी। इस फैसले से बेल्जियम काफी नाराज़ था। हालांकि इसके बावजूद बेल्जियम ने मैच जीत लिया और सोशल मीडिया पर लिखा, "हिम्मत है तो अब पलट कर दिखाओ।"
वहीं मिस्त्र की टीम का एक गोल रद्द होना भी पूरे टूर्नामेंट के सबसे बड़े विवादों में शामिल रहा। अर्जेंटीना के खिलाफ राउंड ऑफ 16 में जिको द्वारा किया गया गोल वीएआर के बाद रद्द कर दिया गया। इसके बाद जिको मैदान पर ही नाराज़ नजर आए। टीम ने फीफा पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा कि फीफा चाहता है कि अर्जेंटीना और मेसी आगे बढ़ें।
एम्बापे का गोल्डन बूट
हर वर्ल्ड कप में गोल्डन बूट को लेकर अलग ही रोमांच रहता है। इस बार मेसी, एम्बापे और हैरी केन इसके प्रमुख दावेदार थे। आखिरकार 10 गोल के साथ एम्बापे ने गोल्डन बूट अपने नाम किया। वे फीफा वर्ल्ड कप के इतिहास में लगातार दो बार गोल्डन बूट जीतने वाले पहले फुटबॉलर बन गए। इससे पहले उन्होंने 2022 के कतर वर्ल्ड कप में भी 8 गोल के साथ यह सम्मान जीता था। भले ही फ्रांस चौथे स्थान पर रहा, लेकिन एम्बापे ने अपने शानदार प्रदर्शन से पूरी दुनिया का दिल जीत लिया।
और हमारे हीरो फेरान टोरेस
इस बार स्पेन की जीत पूरी तरह टीमवर्क का नतीजा रही। अर्जेंटीना के पास मेसी जैसे महान खिलाड़ी थे और पिछली बार के विश्व विजेता होने का आत्मविश्वास भी। इसके बावजूद स्पेन ने शुरुआत से ही मैच पर दबाव बनाए रखा। आखिरकार एक्स्ट्रा टाइम में फेरान टोरेस के गोल ने अर्जेंटीना का लगातार दूसरी बार वर्ल्ड कप जीतने का सपना तोड़ दिया। यह गोल लंबे समय तक याद रखा जाएगा।
फेरान टोरेस अपनी तेज़ रफ्तार, शानदार ऑफ-द-बॉल मूवमेंट और कई अटैकिंग पोजिशन पर खेलने की क्षमता के लिए जाने जाते हैं। खास बात यह रही कि उन्हें शुरुआती अंतिम 11 में भी जगह नहीं मिली थी। वे विकल्प खिलाड़ी के रूप में मैदान पर उतरे, लेकिन मौका मिलते ही मैच के सबसे बड़े हीरो बन गए।
खैर, फीफा वर्ल्ड कप अब खत्म हो चुका है। लेकिन फुटबॉल प्रेमियों की यादों और चर्चाओं में यह टूर्नामेंट लंबे समय तक ज़िंदा रहेगा। स्पेन ने अपने शानदार खेल के दम पर अर्जेंटीना से लगभग 60 साल पुराना हिसाब भी बराबर कर लिया।
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