कभी अर्श पर, कभी फर्श पर
अपनी बुलंदियों पर यूं गुमान ना कर।
तुझे मेहनतों का सिला ना मिला,
तू याद कर तुझसे क्या हुआ।
यह लाइन आज जर्मनी की फुटबॉल टीम पर बिल्कुल सटीक बैठती है। जर्मनी, जो 2014 की विश्व कप विजेता टीम थी और जिसने 2014 के सेमीफाइनल में ब्राज़ील को 7-1 से हराया था, लेकिन आज 2026 में वह टॉप 16 में भी जगह नहीं बना पाई। यह सच में बेहद हैरान कर देने वाली बात है। विश्व कप 2026 के राउंड ऑफ 32 के मुकाबले में मैच निर्धारित समय तक 1-1 से बराबर रहा। वहीं पेनल्टी शूटआउट में पैराग्वे ने उसे 4-3 से हरा दिया। हाफ टाइम से 3 मिनट पहले यानी मैच के 42वें मिनट में पैराग्वे के जूलियो ने गोल करके टीम को लीड दिला दी। जबकि 54वें मिनट में ही जर्मनी के काई हावर्ट्ज़ ने स्कोर बराबरी पर ला दिया। लेकिन इस मैच के हीरो रहे जूलियो। वहीं जर्मनी जैसी मजबूत टीम को हराकर पैराग्वे ने साबित कर दिया कि अगर आपने किसी को कम आंका तो यह आपकी भूल साबित हो सकती है। शायद इससे पहले हम और आप मध्य-दक्षिण अमेरिका में स्थित इस खूबसूरत से देश के बारे में कम ही जानते थे। लेकिन आज फुटबॉल विश्व कप के टॉप 16 में जगह बनाकर इस टीम ने अपने हौसले की दास्तां लिख दी है।
जो सुना था, वो साबित हो गया
हम हमेशा से सुनते आए हैं कि इस दुनिया में आपके हाथ में कुछ भी नहीं है। आपके बस में सिर्फ इतना-सा है कि आप मेहनत कर सकते हो। अपनी तरफ से बेस्ट कर सकते हो, लेकिन रिजल्ट पर आपका कोई कंट्रोल नहीं। यह बात बहुत बार हम मोटिवेशनल स्पीकर्स से, धर्मगुरुओं से, यहां तक कि अपने बड़ों से सुनते हैं। लेकिन प्रैक्टिकल तौर पर समझ नहीं पाते। हमें लगता है कि यह सब तो किताबी बातें हैं। लेकिन जीवन की इस सीख का प्रैक्टिकल इस मैच में देखने को मिला। जहां जर्मनी के पास बॉल पज़ेशन 75% रहा। 92% एक्यूरेसी के साथ खिलाड़ियों ने 753 पास दिए। 21 बार शॉट अटेम्प्ट हुए, जिनमें 7 ऑन टारगेट रहे। 16 कॉर्नर मिले, लेकिन गोल रहा सिर्फ 1। जबकि इसके उलट पैराग्वे की बॉल पज़ेशन 25% रही। 70% एक्यूरेसी के साथ खिलाड़ियों ने मात्र 262 पास दिए। 7 बार शॉट अटेम्प्ट हुए, जिनमें 4 ऑन टारगेट रहे। गिने-चुने 6 कॉर्नर मिले, लेकिन फिर भी वो मैच में एक गोल करने में कामयाब रहे। अब राउंड ऑफ 32 चल रहा है, जिसमें जीत-हार का फैसला होना ज़रूरी है। यहां ड्रॉ से काम नहीं चलेगा, तो फिर विजेता का फैसला पेनल्टी शूटआउट से होता है।
पेनल्टी शूटआउट है क्या
निर्धारित समय (90 मिनट) और एक्स्ट्रा टाइम (30 मिनट) तक भी दोनों टीमों का स्कोर बराबर रहे, तो मैच का रिजल्ट निकालने के लिए पेनल्टी शूटआउट का इस्तेमाल किया जाता है। इसके अंदर दोनों टीमों को 5-5 पेनल्टी किक दी जाती हैं। दोनों टीमें एक-एक करके 5-5 पेनल्टी किक लेती हैं। जो टीम ज्यादा गोल करती है, वही विजेता होती है। मान लीजिए 5 किक के बाद भी स्कोर बराबर ही रहा, तो फिर शुरू होती है अचानक मौत यानी 'सडन डेथ'। इसमें टीमें तब तक 1-1 किक लेती हैं, जब तक एक टीम गोल कर दे और दूसरी चूक न जाए।
लो जी, सडन डेथ में सडन ही कुछ हो गया
इस मैच में जर्मनी की टीम सडन डेथ में हार गई। जहां जर्मनी ने पहली और चौथी पेनल्टी किक मिस की। वहीं पैराग्वे ने चौथी और पांचवीं पेनल्टी मिस की। इसके बाद पेनल्टी किक का स्कोर रहा 3-3। और फिर शुरू हुआ सडन डेथ, जहां जर्मनी मिस और पैराग्वे हिट। आखिरकार पेनल्टी शूटआउट का फाइनल स्कोर रहा पैराग्वे 4 और जर्मनी 3।
अब आएगा खेल का मजा
खैर, अभी दिल्ली दूर है। 19 जुलाई तक यह घमासान जारी रहेगा। फुटबॉल के मैच अब केवल रोमांच तक सीमित नहीं रह गए हैं। अगर आप इन्हें गौर से देखें तो खेल के इन दांव-पेंचों में आपको जिंदगी के दांव-पेंच भी समझ में आएंगे। फिलहाल यह समय पैराग्वे के लिए सेलिब्रेशन का है। इस बार तो खैर पैराग्वे अंडरडॉग थी, लेकिन अगली बार के मैच में फुटबॉल फैंस उनसे बहुत उम्मीदें लगाएंगे। अब देखना यह है कि अगले मैचों में फुटबॉल की दिग्गज टीमों से लड़ने और जीतने के लिए पैराग्वे की रणनीति क्या रहती है।
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