स्पेन की दीवार के सामने नहीं चल पाया एम्बापे का जादू, फ्रांस सेमिफाइनल से बाहर

स्पेन की दीवार के सामने नहीं चल पाया एम्बापे का जादू, फ्रांस सेमिफाइनल से बाहर

फीफा वर्ल्ड कप जीतने के लिए इस समय सेमिफाइनल में पहुंची टीमें अपना सर्वश्रेष्ठ देने की पूरी कोशिश कर रही हैं। फीफा वर्ल्ड कप ट्रॉफी अब सिर्फ एक मैच की दूरी पर है। फ्रांस को सेमिफाइनल में हराकर स्पेन वह पहली टीम बन चुकी है, जो फाइनल में इंग्लैंड या अर्जेंटीना से मुकाबला करेगी। स्पेन ने फ्रांस को सेमिफाइनल में 2-0 से हराया। एम्बापे जैसे स्टार स्ट्राइकर के बावजूद भी फ्रांस अपना खाता तक नहीं खोल पाई।

तो क्या एक नए रिकॉर्ड की तैयारी है

इस बार स्पेन के गोलकीपर उनाई सिमोन एक हीरो के तौर पर उभरे हैं। वर्ल्ड कप में उनके सामने अब तक जितनी भी टीमें आई हैं, उनमें केवल बेल्जियम ही ऐसी टीम रही, जो एक गोल करने में सफल रही। उसी गोल की वजह से उनका 650 मिनट का क्लीन शीट रिकॉर्ड भी टूटा। वरना स्पेन लगातार सामने वाली टीम को बिना गोल किए आगे बढ़ती जा रही थी। उनाई का यह रिकॉर्ड पिछले वर्ल्ड कप से बन रहा था।

किसी टीम को गोल करने का मौका ही न देना अपने आप में बहुत बड़ी बात है। उनाई ने अपनी प्रतिभा से साबित किया है कि एक गोलकीपर भी दुनिया के टॉप स्ट्राइकरों को लोहे के चने चबवा सकता है। सेमिफाइनल में भी फ्रांस एक भी गोल नहीं कर पाई। इसे देखकर लगता है कि उनाई शायद अपने ही गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज क्लीन शीट रिकॉर्ड को और आगे ले जाने की तैयारी में हैं।

स्पेन की मिडफील्ड के सामने कमजोर पड़ी फ्रांस

हालांकि फ्रांस एक मजबूत टीम है, लेकिन यह तीसरा मौका है जब स्पेन के सामने वह कमजोर नजर आई। फ्रांस के कप्तान एम्बापे ने कहा कि हमने स्पेन को मिडफील्ड में काफी जगह दे दी, जिसकी वजह से स्पेन खेल पर हावी होती गई। हम उनकी रणनीति को बदलने में सफल नहीं हो पाए। मिडफील्ड में ज्यादा मुस्तैद रहने की जरूरत थी। पेनल्टी से भी स्पेन को फायदा मिला।

टूट गया गोल्डन बूट का सपना भी

अगर इस मुकाबले की बात करें तो स्पेन की मिडफील्ड रणनीति का उसे भरपूर फायदा मिला। मैच शुरू होने के 22वें मिनट में ही स्पेन के खिलाड़ी ओयारज़ाबाल ने पेनल्टी का फायदा उठाते हुए टीम के लिए पहला गोल कर दिया। इससे टीम को शुरुआती बढ़त मिली और खिलाड़ियों का मनोबल भी बढ़ा। हालांकि 58वें मिनट तक स्पेन केवल एक गोल से आगे थी, लेकिन इसके बाद डिफेंडर पेड्रो पोरो ने गोल कर बढ़त को दोगुना कर दिया। यही दो गोल स्पेन के लिए निर्णायक साबित हुए। इस टीम का डिफेंस पहले से ही शानदार रहा है। यही कारण है कि एम्बापे जैसे स्टार स्ट्राइकर, जो 8 गोल के साथ गोल्डन बूट की दौड़ में सबसे आगे थे, इस मैच में एक भी गोल नहीं कर पाए।

फ्रांसीसी जनता हार को नहीं समझ पा रही

एम्बापे ने अपनी और अपनी टीम की हार को स्वीकार कर लिया है। लेकिन फ्रांस की जनता के लिए इस हार को स्वीकार करना आसान नहीं है। वहां के नागरिक सेमिफाइनल में मिली हार से बेहद आहत हैं। फ्रांस की राजधानी पेरिस में लोगों ने सड़कों पर उतरकर नारेबाजी की और आगजनी भी की। इसके फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहे हैं। फ्रांस इससे पहले 1998 और 2018 में वर्ल्ड कप जीत चुका है।

16 साल बाद फाइनल में पहुंचा

फाइनल तक पहुंचने के लिए स्पेन की मेहनत कम नहीं रही। 2010 के बाद यह दूसरा मौका है, जब वह वर्ल्ड कप फाइनल में पहुंचा है। इसके साथ ही स्पेन ने फीफा का 96 साल पुराना रिकॉर्ड भी तोड़ दिया है। मौजूदा यूरो चैंपियन रहते हुए दो बार वर्ल्ड कप फाइनल में पहुंचने वाली वह दूसरी टीम बन गई है। इसके अलावा स्पेन वर्ल्ड कप के एक संस्करण में सबसे ज्यादा 6 क्लीन शीट रखने वाली पहली टीम भी बन गई है। इससे पहले यह रिकॉर्ड नीदरलैंड्स (1974), इटली (1990), ब्राज़ील (1994), फ्रांस (1998) और स्पेन (2010) के नाम था, जिन्होंने एक-एक विश्व कप में 5-5 क्लीन शीट दर्ज की थीं।

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