पीटी उषा का 42 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ विथ्या रामराज ने एशियन गेम्स में जीता ब्रॉन्ज

पीटी उषा का 42 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ विथ्या रामराज ने एशियन गेम्स में जीता ब्रॉन्ज

जब आप किसी चीज को पूरी शिद्दत से चाहते हैं तो पूरी कायनात आपको उसे मिलाने के पीछे लग जाती है। यह बेशक एक फिल्म का डायलॉग है। फिल्मों के ये डायलॉग सुनकर हमें लगता है कि शायद सच में ऐसा ही होता होगा। लेकिन जनाब, फिल्मों की और हकीकत की जिंदगी की कहानी कुछ और होती है। एशियन गेम्स में एक नायक के तौर पर उभरीं विथ्या रामराज की कहानी तो संघर्ष की स्याही से लिखी गई है। एशियन गेम्स में ब्रॉन्ज मिलने के बाद वह आज भले ही सुर्खियों में हैं, लेकिन आज के दिन की हीरो बनने के पीछे उन्होंने जो मेहनत की है, वह वाकई बेमिसाल है।

42 साल पुराना रिकॉर्ड

अगर रेस की बात करें तो हमारे लिए पीटी उषा एक नायक हैं। अगर कोई अच्छा दौड़ता है तो हम कहते हैं, "अरे भई, यह तो पीटी उषा की तरह दौड़ रही है।" आज भी पीटी उषा को भारत की उड़न परी कहा जाता है।

साल 1984 में लॉस एंजिल्स में हुए ओलंपिक में उन्होंने 400 मीटर बाधा दौड़ में 55.42 सेकंड का समय लिया था। यह अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि थी। इसके बाद पीटी उषा सुर्खियों में आई थीं। उनका यह राष्ट्रीय रिकॉर्ड करीब 42 साल तक कायम रहा और कोई भारतीय धावक इसे तोड़ नहीं पाया।

लेकिन अब विथ्या रामराज ने 54.75 सेकंड के अपने व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के साथ इस रिकॉर्ड को तोड़ दिया है। उन्होंने एशियन गेम्स में कांस्य पदक भी अपने नाम किया है।

कौन हैं विथ्या रामराज?

तमिलनाडु की रहने वाली विथ्या रामराज एक साधारण परिवार से आती हैं। उन्हें जिंदगी में कुछ भी थाली में सजा हुआ और परोसा हुआ नहीं मिला। उनके पिता ट्रक ड्राइवर हैं। विथ्या का जन्म 20 सितंबर 1998 को हुआ था।

आज के परिप्रेक्ष्य में उनका नाम भारत की उभरती महिला एथलीटों में लिया जाता है। उन्होंने पिछले कुछ वर्षों में 400 मीटर बाधा दौड़ में अपनी शानदार प्रतिभा का परिचय दिया है। वह लंबे समय से अपना बेहतरीन प्रदर्शन कर रही हैं। वहीं, उनकी नजर पीटी उषा के रिकॉर्ड पर भी थी। वह चाहती थीं कि इस रिकॉर्ड को तोड़ पाएं।

लेकिन चीजें जितनी आसान लगती हैं, उतनी होती नहीं हैं। एशियन गेम्स 2023 में विथ्या ने पीटी उषा के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली थी, लेकिन उससे आगे नहीं निकल पाईं। उन्होंने हार नहीं मानी और अब 42 साल पुराने उस रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है।

दादी और पिता ने दिया साथ

विथ्या ने अपना यह पदक अपनी जुड़वा बहन को समर्पित किया है। उनकी बहन भी धावक हैं। विथ्या ने बताया कि उनके पिता ट्रक ड्राइवर हैं और उनकी आमदनी करीब 15 हजार रुपये प्रति महीने थी।

जब आप खेल की तैयारी करते हैं तो जूते, किट और आहार, सभी कुछ महंगा होता है। लेकिन मेरे पिता ने जैसे-तैसे सभी चीजों को मैनेज किया। हम किराए के घर में रहते थे। लोग मेरी दादी और पिता को ताने मारा करते थे। लेकिन सभी को अनसुना करते हुए उन्होंने मेरे और मेरी बहन के सपनों को आकार दिया।

हम दोनों बहनों के सपने हमारी हैसियत से कहीं बड़े थे, लेकिन पिता ने परिस्थितियों के सामने हमारे सपनों को छोटा नहीं होने दिया।

इस पदक के लिए मैं सिर्फ इतना कहूंगी कि आज का दिन हमारा था। इस बार मेरा ध्यान पदक पर नहीं, बल्कि समय पर था। मेरे कोच नेहपाल सिंह राठौड़ ने मुझे तेज शुरुआत करने और छठी बाधा तक अपनी गति बनाए रखने को कहा था। छठी बाधा से फिनिश लाइन तक मैंने पूरी ताकत लगा दी।

तो देखिए, एक्स पर पीटी उषा ने क्या लिखा

स्पोर्ट्समैनशिप वाकई कमाल होती है। जब विथ्या ने पीटी उषा का यह रिकॉर्ड तोड़ा तो उन्होंने एक वरिष्ठ खिलाड़ी का फर्ज निभाते हुए उनकी हौसला-अफजाई की और एक्स पर लिखा।

पीटी उषा ने विथ्या को बधाई देते हुए कहा कि रिकॉर्ड टूटने के लिए ही बनते हैं और एक एथलीट के लिए इससे बड़ा कोई इनाम नहीं हो सकता कि वह अगली पीढ़ी को उन सीमाओं से आगे जाते हुए देखे, जो कभी उन्होंने तय की थीं।

उन्होंने विथ्या रामराज द्वारा 400 मीटर बाधा दौड़ में अपना 42 साल पुराना राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़े जाने को अपने लिए बेहद खास क्षण बताया।

एक एथलीट के रूप में हम खुद को चुनौती देने, सीमाओं को पार करने और अंततः खेल को पहले से बेहतर स्थिति में छोड़ने के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं। जब कोई युवा एथलीट आगे आता है और दशकों पुराने मील के पत्थर को पार करता है तो यह न केवल उस खिलाड़ी के लिए, बल्कि पूरे खेल के लिए गर्व का क्षण होता है।

किसी रिकॉर्ड की सबसे बड़ी विरासत यह नहीं है कि वह कितने समय तक कायम रहता है, बल्कि यह है कि वह अगली पीढ़ी को उससे आगे बढ़ने के सपने देखने के लिए कैसे प्रेरित करता है।

खैर, हम उम्मीद करते हैं कि विथ्या जैसी लड़कियों का हौसला यूं ही कायम रहे। हम भारत की बेटियों को ऐसे ही आगे बढ़ते हुए और नित नए कीर्तिमान रचते हुए देखें।

वहीं, बधाई की पात्र विथ्या के पिता भी हैं, जिन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद बेटियों के सपनों को अपना बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। किस्मत वाली हैं विथ्या, जिन्हें एक ऐसे पिता मिले, जिन्होंने परिस्थितियों के आगे बेटियों के सपनों को छोटा नहीं होने दिया।

इस तरह के और लेख पढ़ने के लिए हमारी केटेगरी "स्पोर्ट्स" पर क्लिक करें।

अलविदा आम, तुम्हारा इंतज़ार रहेगा, अगले मौसम में मिलेंगे
अलविदा आम, तुम्हारा इंतज़ार रहेगा, अगले मौसम में मिलेंगे

आम फलों का राजा है, अलसाई गर्मी की दोपहर का एक साथी। गर्मी के मौसम में जब आता है तो झुलसती हुई गर्मी के साथ अपनी ठंडी मिठास भी लेकर आता है। लेकिन अब...

Read More
हो जाइए तैयार, आ रहा है टीवी का कंट्रोवर्शियल रियलिटी टीवी शो बिग बॉस
हो जाइए तैयार, आ रहा है टीवी का कंट्रोवर्शियल रियलिटी टीवी शो बिग बॉस

प्यार, तकरार, बनते बिगड़ते रिश्ते, घर को चलाने और हर दिन एक नए चैलेंज से भरा मोस्ट कंट्रोवर्शियल और लोकप्रिय रियलिटी शो बिग बॉस। इस शो के नए सीजन का...

Read More