अक्सर पैसे वाले लोग अपने बच्चों को उनके जन्मदिन पर महंगे तोहफे गिफ्ट करते हैं, लेकिन यहां बात सिर्फ अपने बेटे के 18वें जन्मदिन पर तीन करोड़ की ऑडी गाड़ी गिफ्ट करने की नहीं है। इससे भी दिलचस्प है 31 लाख के वीआईपी नंबर RJ 60 CM 0001 की। जयपुर के बिजनेस टायकून राहुल तनेजा ने अपने बेटे रेहान तनेजा के लिए यह गाड़ी और यह वीआईपी नंबर खरीदा है। यह नंबर राजस्थान का अब तक का सबसे महंगा वाहन नंबर बन चुका है। गाड़ी से ज्यादा इस नंबर को लेकर और राहुल की लाइफस्टाइल को लेकर इस वक्त चर्चा है। राहुल को महंगी गाड़ियों और अपनी गाड़ी के लिए ऐसे ही वीआईपी नंबर लेने का शौक है। यह नंबर उन्हें ई-ऑक्शन के जरिए मिला है, जो 15 अक्टूबर से शुरू होकर 31 अक्टूबर तक चला। इसमें 12 लोगों ने हिस्सा लिया, लेकिन अंत में राहुल यह नंबर पाने में कामयाब रहे।
आपको बता दें कि राजस्थान में इस तरह के वीआईपी नंबर लेने का काफी क्रेज है और अक्सर ये नंबर लाखों में बिकते हैं। यह नंबर चैंपियन कैटेगरी में आता है।
इस नंबर के पीछे की कहानी
अब अगर हम पहली बार देखेंगे तो लगेगा कि भई, यह तो शौक की चीज है। अमूमन अमीरों के इस तरह के शौक होते हैं। लेकिन नहीं, राहुल तनेजा ने अपने बेटे को यह नंबर एक जिम्मेदारी के तौर पर दिया है। राहुल आज भले ही बिजनेस की दुनिया का एक जाना-माना नाम बन चुके हैं, लेकिन वह किसी बिजनेस फैमिली में पैदा नहीं हुए, बल्कि उन्होंने ढाबे में वेटर तक का काम किया है। जयपुर में वह ऑटो भी चलाते थे और दीवाली के सीजन में फुटपाथ पर पटाखे भी बेचा करते थे। लेकिन उनका मानना है कि आप जो भी काम करो, उसमें नंबर वन रहो। इसलिए बेटे को 18वें बर्थडे पर यह नंबर गिफ्ट किया है ताकि उसे हमेशा याद रहे कि वह जिंदगी में चाहे कुछ भी करे, लेकिन बस उसे नंबर वन बनना है।
आसान नहीं होता नंबर वन बने रहना
राहुल आज एक इवेंट मैनेजमेंट कंपनी के ओनर हैं। लेकिन वह कहते हैं — आज ऊपरवाले का दिया मेरे पास सब कुछ है। मैंने अपनी जिंदगी को चलाने के लिए जो भी काम किए, उन्हें कभी छोटा नहीं समझा। मैं वेटर था, झूठे बर्तन भी उठाता था। गर्मियों में मैंने कॉमिक्स बेची हैं, होली पर मैं रंगों का व्यापारी बन जाता था और मकर संक्रांति पर खूब पतंगे बेचता था। मैं मानता हूं कि जमीनी स्तर पर किए मेरे इन कामों ने मुझे बहुत मजबूत किया और बिजनेस की बारीकियां सिखाईं। मैं मेहनत से कल भी नहीं डरता था और आज भी नहीं डरता। मैं मानता हूं कि आप जिंदगी में कुछ भी करो, अपने काम को कभी छोटा मत समझो। अपने काम की इज्जत करो और उसमें नंबर वन रहो।
जिंदगी जीने का नाम है
राहुल मानते हैं कि जिंदगी खुशियां बांटने का नाम है। वे कहते हैं — आपको कुछ भी नहीं पता कि कल क्या होने वाला है। अपनी जिंदगी में खूब मेहनत करो, और हमेशा खुश रहने की कोशिश करो। उनके लिए नंबर वन एक नंबर नहीं बल्कि एक टारगेट है — खुद को अपने टारगेट से हमेशा ज्यादा अचीव करने का। वह कहते हैं कि हालात तो होते ही हैं आपको तोड़ने के लिए, लेकिन उसे अड़चन की दीवार मत बनाओ। बल्कि उस दीवार को लांघकर और ऊपर की ओर छलांग लगा लो। नंबर वन का खुद को टारगेट दिया और अब लग्जरी कारों का स्टीयरिंग मेरे हाथों में है, जिन हाथों में कभी ऑटो के गियर हुआ करते थे।
राहुल की कहानी हमें बताती है कि हम सपने देख सकते हैं। बस उन सपनों को पूरा करने की रणनीति हमारे पास होनी चाहिए। हर किसी को चांदी का चम्मच मुंह में नहीं मिलता। कुछ लोगों को इसे अपनी मेहनत से खरीदकर अपने मुंह में लेना होता है।
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