जयपुर एक सपनों के शहर जैसा लगता है। आपने राजा-महाराजाओं के किस्से-कहानियां तो किताबों में पढ़े होंगे। लेकिन यहां आकर आप महलों, हवेलियों को देखकर अनुमान लगा सकते हैं कि वाकई इस शहर की तासीर क्या है। हां, अगर आप जयपुर को बहुत तसल्ली से देखना चाहते हैं और शहर के भी पास रहना चाहते हैं, तो आपके लिए रामगढ़ मोड़ पर स्टे करना बेहतरीन विकल्प हो सकता है। यहां रहकर आप आमेर, नाहरगढ़, जलमहल के तो पास रहेंगे ही, बल्कि खाने का जायका भी आपको अलग ही मिलने वाला है। आप 20 रुपये प्रति सवारी देकर भी वॉल सिटी में आसानी से पहुंच सकते हैं।
वो राजा वाली वाइब
अब हमने राजा-महाराजाओं का वो दौर तो नहीं देखा होगा लेकिन आपको बता दें कि अगर आमेर पहुंचकर आप थोड़ा स्मार्टली एलिफेंट राइड को प्लान करेंगे तो आप सच में थोड़ा सा हिंट ले पाएंगे कि एक राजा की जिंदगी क्या होती है। जी हां सुबह के समय जल्दी पहुंचकर आपको यह बुकिंग लेनी होती है। यह बुकिंग सुबह 7 बजे से 11 बजे तक ही होती है। दो लोगों के लिए 2500 रुपए की राइड बुक होती है। लेकिन राजा जैसी जिंदगी जीना आसान नहीं होता। चूंकि हाथी सीमित मात्रा में हैं और इनका राउंड भी तय होता है। ऐसे में स्लॉट खत्म होने के बाद बुकिंग नहीं ली जाती। तो बस आप सोचिए कि हाथी पर बैठकर महल में प्रवेश करना कैसा अनुभव होने वाला है। मुझे लगता है कि अपने बच्चों को एक बार यह एक्सपीरियंस करवाना चाहिए ताकि उन्हें पता तो चले कि शाही सवारी के मायने होते क्या हैं?
हैरान होंगे यह जानकर कि आज भी एक हाथी को खरीदना और उसे रखना एक आम आदमी के बस की बात नहीं है। एक हाथी की कीमत 30 से 50 लाख होती है। एक हाथी पर रोजाना लगभग 5 से 7 हजार खर्च होते हैं। ऐसे में सोचिए और बच्चों को बताइए कि एक राजा का जीवन कैसा होता होगा। उनके पास तो हाथियों की फौज होती थी।
दीवाली के लिए राम का दरबार
वैसे तो जयपुर के बाजार हमेशा टूरिस्ट को पसंद आते हैं। लेकिन अगर आप दीवाली के आसपास जयपुर आने का प्लान बना रहे हैं तो दीवाली डेकोरेशन भी खास रहने वाली है। जयपुर के प्रमुख व्यापार मंडल दीवाली पर थीम बेस्ड डेकोरेशन करते हैं। जयपुर में बापू बाजार, नेहरू बाजार, जौहरी बाजार आदि में कड़ा मुकाबला रहता है। यहां व्यापार मंडल में ना केवल डेकोरेशन होता है बल्कि कंपटीशन भी होता है। ऐसे में आपके लिए इन बाजारों को रोशनी में झिलमिलाते हुए देखना अपने आप में एक अलग ही तरह का अनुभव होने वाला है। बस आप पैदल चलिए, रोशनी को देखिए। दीवाली की सजावट 1 नवंबर से शुरू हो गई है। आप अभी भी जयपुर आने का प्लान कर सकते हैं। यह सजावट 11 नवंबर तक रहेगी। इस बार छोटी चौपड़ पर राम दरबार और पांच बत्ती पर विशेष पिंक थीम लाइटिंग आकर्षण का केंद्र होगी। अब राम का दरबार कैसा सजेगा यह तो आपको देखकर ही पता चलेगा।
रंग दे बसंती वाली नहीं दीवाली वाली फीलिंग
जयपुर के नाहरगढ़ से जो जयपुर दिखता है वो अपने आप में काफी अलग है। रात को यहां से शहर को देखना रोमांचित करता है। वैसे तो आपने आमिर खान की फिल्म रंग दे बसंती के जरिए नाहरगढ़ को देखा है। लेकिन रात में और वो दीवाली पर इसे देखना अपने आप में कमाल है। आप खुद सोचिए कि हम आतिशबाजी अपनी निगाह उठाकर देखते हैं लेकिन नाहरगढ़ से जब आप जयपुर को देखेंगे तो आप ना केवल रोशन देखेंगे बल्कि यह भी देख पाएंगे कि रॉकेट या दूसरे पटाखे जब आसमान में जाकर अपनी छटा बिखेरते हैं तो वो ऊपर से देखने पर कैसे लगते होंगे। यानी कि आपकी नजर आसमान में नहीं होगी। आप ऊपर से देखेंगे। आपको बता दें कि नाहरगढ़ आमेर के पास स्थित एक किला है। जो कि जयपुर शहर के धरातल (शहर के तल) से लगभग 700 फीट (करीब 213 मीटर) की ऊंचाई पर अरावली की पहाड़ियों की चोटी पर स्थित है। यहां आप पड़ाव रेस्तरां से जयपुर के खूबसूरत व्यू का आनंद ले सकते हैं। पड़ाव रेस्तरां राजस्थान पर्यटन विकास निगम की ओर से संचालित है। यहां एंट्री फीस 100 रुपए प्रति व्यक्ति है। इसमें एक कॉम्प्लिमेंट्री ड्रिंक भी शामिल होती है। वैसे भी यहां लोग खाने के लिए नहीं बल्कि व्यू के लिए जाते हैं।
शाम की कॉफी और संस्कृति
जयपुर कल्चरल्ली बहुत रिच है। लेकिन अगर आप नवंबर माह में यहां आ रहे हैं और कला संस्कृति से आपको विशेष प्रेम है तो जवाहर कला केंद्र जाना ना भूलिएगा। नवंबर माह में यहां लोकरंग उत्सव आयोजित हो रहा है। यह 6 नवंबर तक होगा। इसमें देश के 26 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 3,700 से अधिक कलाकार और शिल्पकार हिस्सा ले रहे हैं। इस उत्सव में राजस्थान के प्रसिद्ध घूमर, कालबेलिया, भवाई और चरी नृत्य के साथ-साथ अलवर-भरतपुर क्षेत्र का बम रसिया (बम नृत्य) देखने को मिल रहा है। इसके अलावा अन्य राज्यों के प्रसिद्ध नृत्य जैसे पंजाब का लुड्डी, हिमाचल की नाटी, छत्तीसगढ़ का गेड़ी नृत्य, झारखंड का सरायकेला छऊ और पुरुलिया छऊ भी मुख्य आकर्षण हैं। वहीं इस बार का सबसे बड़ा और प्रमुख आकर्षण बीकानेर के जसनाथी संप्रदाय के सिद्ध कलाकारों द्वारा किया जाने वाला विश्व प्रसिद्ध अग्नि नृत्य है। कलाकार धधकते हुए अंगारों पर थिरकते हैं, उन्हें हाथों में उठाते हैं और मुंह में लेकर हैरतअंगेज प्रस्तुतियां देते हैं। इसके अलावा इस उत्सव में स्टॉल्स भी बहुत खास हैं। इसमें लद्दाख से लेकर लक्षद्वीप और नागालैंड से गुजरात तक की लोक संस्कृति, पारंपरिक लोकनृत्य, अग्नि नृत्य और हस्तशिल्प के स्टॉल सजाए गए हैं।
इसके अलावा भी पूरे नवंबर में भांति-भांति के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का यहां आयोजन होगा। आप इसके बारे में जानकारी जेकेके की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर ले सकते हैं।
तो यह थी जयपुर को लेकर हमारी पहली कड़ी। यह आपको एक सीरीज के तौर पर स्टोरीज मिलेंगी। इस स्टोरी में हमने आपको जयपुर की महक दिखाई दी है। दूसरी कड़ी में आपको बहुत कुछ खास मिलने वाला है। अब जब इंसान जयपुर आता है तो शॉपिंग के बिना वो नहीं जा सकता। हमारी अगली स्टोरी आपके लिए ना केवल बाजारों की जानकारी लेकर आएगी बल्कि वो एक शॉपिंग गाइड का भी काम करेगी। तो बस पढ़ते रहिए लेख जंक्शन को। आगे बहुत कुछ अलग और खास होने वाला है।



